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Alwar News: जर्जर हुआ तिजारा ओवरब्रिज, UIT की लापरवाही से बड़े हादसे का डर

अलवर में तिजारा ओवरब्रिज लगातार जर्जर हो रहा है, लेकिन यूआइटी (UIT) इसके रखरखाव को लेकर पूरी तरह बेफिक्र है। मरम्मत के लिए बजट जारी न होने से कभी भी कोई बड़ा नुकसान हो सकता है।

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Jun 23, 2026
tijara overbridge
तिजारा ओवरब्रिज की टाइलों से बाहर निकलता कंक्रीट (फोटो - पत्रिका)

अलवर का तिजारा ओवरब्रिज इस वक्त बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। इस ओवरब्रिज का निर्माण राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (आरएसआरडीसी) की ओर से साल 2012-13 में किया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि शुरुआत से ही इस ब्रिज की कहानी गड़बड़ रही है। जब यह ब्रिज बनकर तैयार हुआ, तब हैंडओवर से पहले एक राज्य स्तरीय टीम ने इसकी जांच की थी।

उस जांच में ब्रिज के काम में कई बड़ी खामियां और कमियां पाई गई थी। नियम के मुताबिक, उन कमियों को ठीक करने के बाद ही इस पर ट्रैफिक शुरू होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आनन-फानन में वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई और उसके बाद किसी भी विभाग ने मुड़कर नहीं देखा।

गैप बढ़े, कंक्रीट निकला बाहर

आज करीब एक दशक बीत जाने के बाद इस लापरवाही का नतीजा सबके सामने है। ओवरब्रिज की टाइल्स के बीच का गैप लगातार बढ़ता जा रहा है। जगह-जगह से कंक्रीट उखड़कर बाहर आने लगा है। इतना ही नहीं, पुल को मजबूती देने वाले इसके बेयरिंग भी पूरी तरह से मरम्मत मांग रहे हैं। रोजाना इस रास्ते से हजारों गाड़ियां और भारी वाहन गुजरते हैं। वाहनों के भारी वजन के कारण ब्रिज की हालत दिन-ब-दिन और खराब होती जा रही है। स्थानीय लोगों और जानकारों का साफ कहना है कि अगर वक्त रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई, तो यहां कभी भी कोई दर्दनाक हादसा हो सकता है।

फाइल दबाकर बैठे अफसर

ऐसा नहीं है कि प्रशासन इस खतरे से अनजान है। मामले की गंभीरता को देखते हुए यूआइटी ने आरएसआरडीसी से इसका एक टेक्निकल सर्वे भी करवाया था। आरएसआरडीसी ने अपनी इंजीनियरिंग रिपोर्ट काफी समय पहले ही बनाकर यूआइटी को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में साफ बताया गया था कि ब्रिज को कहां-कहां और किस तरह के रिपेयर की जरूरत है। उम्मीद थी कि रिपोर्ट आने के तुरंत बाद काम शुरू हो जाएगा, लेकिन सरकारी कछुआ चाल के कारण फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।


बजट देने में कंजूसी

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अलवर यूआइटी आखिर काम शुरू कराने में ढील क्यों बरत रही है? सूत्रों के मुताबिक, यूआइटी मरम्मत कार्य के लिए आरएसआरडीसी को पैसा देने में कंजूसी कर रही है। न तो आरएसआरडीसी को फंड ट्रांसफर किया जा रहा है और न ही किसी दूसरी प्राइवेट एजेंसी से काम कराने के लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। अधिकारियों की यह अनदेखी अलवर के आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ सकती है। आखिर प्रशासन को जगाने के लिए और कितने दिन का इंतजार करना होगा?

यूआइटी की ओर से हमारे पास कोई वर्क ऑर्डर नहीं आया है और न राशि जारी की गई है - सतीश कुमार, पीडी, आरएसआरडीसी

Published on:
23 Jun 2026 11:56 am