नगर विकास न्यास (यूआईटी) ने दो बड़े प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया और इस बहाने 48 करोड़ रुपए बचा लिए। ये राशि पिछले बजट के जरिए घोषित की गई थी। ऐसे में इस साल के बजट में कटौती हो सकती है। पिछले बजट की शेष राशि आगामी बजट में मर्ज होगी। इसके अलावा बड़े प्रोजेक्ट नए बजट से दूर हो सकते हैं। इसी माह के आखिरी सप्ताह में बजट की बैठक कराने की तैयारी है।

- यूआईटी का बजट था 330 करोड़ का, विकास के लिए मंजूर हुए थे 207 करोड़ रुपए
- इस बार के बजट के बढ़ोत्तरी की आस कम, पहले की बची राशि का इसमें होगा मर्ज
नगर विकास न्यास (यूआईटी) ने दो बड़े प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया और इस बहाने 48 करोड़ रुपए बचा लिए। ये राशि पिछले बजट के जरिए घोषित की गई थी। ऐसे में इस साल के बजट में कटौती हो सकती है। पिछले बजट की शेष राशि आगामी बजट में मर्ज होगी। इसके अलावा बड़े प्रोजेक्ट नए बजट से दूर हो सकते हैं। इसी माह के आखिरी सप्ताह में बजट की बैठक कराने की तैयारी है।
यूआईटी का पिछला बजट 330 करोड़ रुपए का था। इसमें 207 करोड़ रुपए विकास कार्यों के लिए रखे गए थे। इसमें बड़ा प्रोजेक्ट कंपनी बाग में 23.33 करोड़ की लागत से बेसमेंट पार्किंग बननी थी। इसके अलावा 114 करोड़ की लागत से यूआईटी की योजनाओं में काम होने थे। 93 करोड़ रुपए ऐसे हैं जो गैर योजना क्षेत्र के लिए आवंटित किए गए थे। नाली-सीवरेज के नाम 19 करोड़, रोड लाइट, बिजली आदि के लिए 25 करोड़ रुपए आरक्षित किए गए थे। इनमें से अधिकांश कार्य हुए और कुछ काम पाइप लाइन में हैं लेकिन जनता के मतलब का कार्य पार्किंग था जो आज तक पूरा नहीं हो पाया। हालांकि टेंडर जरूर किए गए थे लेकिन सरकार ने रिजेक्ट कर दिए। इसके अलावा 25 करोड़ की लागत से कन्वेंशन सेंटर बनना था। इसके लिए केवल जगह देखी गई। काम नहीं दौड़ पाया।
यूआईटी के एक अधिकारी का कहना है कि पार्किंग का प्रस्ताव फिर आ सकता है लेकिन इसकी राशि कम हो सकती है और जगह बदल सकती है। इसके अलावा विज्ञान पार्क आदि का प्रस्ताव आ सकता है लेकिन इस पर बड़ी राशि खर्च नहीं होगी। सड़कों की मरम्मत से लेकर रोड लाइट आदि पर भी मोटी रकम खर्च हो सकती है। बजट की तैयारी यूआईटी के अधिकारी कर रहे हैं।