
Forester Exam: अलवर जिला मुख्यालय पर रविवार को वनपाल भर्ती परीक्षा को लेकर सुबह से ही परीक्षा केंद्रों पर भारी गहमा-गहमी देखने को मिली। परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और नकल विहीन बनाने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इस परीक्षा के सफल आयोजन के लिए जिलेभर में कुल 53 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जिनमें 15 राजकीय (सरकारी) और 38 निजी (प्राइवेट) विद्यालय व कॉलेज शामिल रहे। सुबह से ही अभ्यर्थी अपने तय केंद्रों पर पहुंचने लगे थे, जहां सुरक्षाकर्मियों ने पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाई।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम प्रथम) योगेश डागुर ने बताया कि परीक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा शुरू होने से ठीक एक घंटे पहले सभी केंद्रों पर अभ्यर्थियों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इसके बाद देर से आने वाले किसी भी परीक्षार्थी को केंद्र के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने और कड़ी निगरानी रखने के लिए प्रशासन की ओर से 9 सतर्कता दल (फ्लाइंग स्क्वायड) और 26 उप समन्वयक दल नियुक्त किए गए थे, जिन्होंने लगातार सभी केंद्रों का दौरा किया।
परीक्षा केंद्र के मुख्य गेट पर सभी महिला और पुरुष अभ्यर्थियों की सघन तलाशी ली गई, जिसके बाद ही उन्हें अंदर जाने दिया गया। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के कड़े ड्रेस कोड के कारण परीक्षा हॉल में कई चीजों पर पूरी तरह पाबंदी रही। अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार के आभूषण, जैसे अंगूठी, कान की बाली, नोज पिन, गले की चेन या लॉकेट पहनकर अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली।
यहां तक कि छात्राओं को बालों में साधारण रबर बैंड के अलावा किसी भी तरह के फैंसी क्लेचर या बैंड लगाने की मनाही थी। इसके अलावा परीक्षा हॉल में घड़ी, बेल्ट, धूप का चश्मा और पर्स ले जाने पर भी पूरी तरह प्रतिबंध रहा।
परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को अपने साथ प्रोविजनल ई-एडमिट कार्ड और पहचान के लिए मूल फोटो पहचान पत्र लाने के निर्देश दिए गए थे। पहचान पत्र के तौर पर अभ्यर्थियों से सरकारी आईडी (जैसे पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य वैध दस्तावेज) की जांच की गई और पूरी तसल्ली के बाद ही उन्हें सीट आवंटित की गई। परीक्षा छूटने के बाद बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर परीक्षार्थियों की भीड़ देखी गई।