अलवर

Alwar: अन्नदाता की पुकार… हे इंद्र देवता बरसो, फसल अच्छी नहीं हुई तो बच्चों का पेट कैसे पालेंगे

कमजोर मानसून ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश नहीं होने से आमजन उमसभरी गर्मी से परेशान है तो किसान चिंतित है कि बारिश नहीं हुई तो फसल को नुकसान होगा। उत्पादन कम होगा और घर चलाना मुश्किल होगा।
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Jul 07, 2026
farming
जिले के खेत में बुवाई जोरों पर है

देशभर में इस बार मानसून कमजोर रहने की घोषणा की गई है। इसके संकेत मिल भी रहे हैं। अलवर जिले में भी मानसून के प्रवेश के बावजूद अभी तक लोगों को तेज बारिश का इंतजार है। कम बारिश का सर्वाधिक असर किसानों पर पड़ने वाला है। बुवाई हो रही है, ऐसे में बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
कृषि विशेषज्ञों ने साफ कर दिया है कि खेती को केवल बारिश के भरोसे छोड़ना अब व्यावहारिक विकल्प नहीं रह गया है। पानी की हर बूंद का बेहतर उपयोग, उन्नत सिंचाई तकनीकों का विस्तार और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि खेती की लागत भी घटाई जा सकती है। इस बार अलवर जिले में करीब 1.98 लाख हैक्टेयर में खरीफ की बुवाई हो रही है। अब तक लक्ष्य के 60 प्रतिशत एरिया में बुवाई हो चुकी है। शेष 40 प्रतिशत में भी जल्द बुवाई का काम पूरा हो जाएगा। लेकिन बुवाई के बाद अगर 10 दिन के भीतर बारिश नहीं हुई तो उत्पादन कम रहेगा। इससे महंगाई भी बढ़ सकती है।

इजरायल में रेगिस्तानी क्षेत्र, फिर भी नहीं घटा उत्पादन

इजरायल में कुल कृषि भूमि का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रेगिस्तानी क्षेत्र में होने के बावजूद वहां आधुनिक सिंचाई तकनीकों और शोध आधारित खेती ने कृषि उत्पादन को बढ़ाया है। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियां सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाकर अनावश्यक जल हानि को रोकती हैं। इसी तरह सेंसर आधारित सिंचाई, फसल निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट मैपिंग जैसी तकनीकें किसानों को जरूरत के अनुसार संसाधनों का उपयोग करने में मदद करती हैं।

यूं मिल सकता है फायदा

कृषि क्षेत्र में तकनीक के उपयोग से संसाधनों की दक्षता बढ़ जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार आधुनिक तकनीकों से पानी की बचत लगभग 50 प्रतिशत, उपज में 30 प्रतिशत तक वृद्धि, उर्वरक की बचत 25 प्रतिशत तथा कीटनाशकों के उपयोग में 20 प्रतिशत तक कमी संभव है। इसके अलावा उपचारित अपशिष्ट जल का लगभग 85 प्रतिशत कृषि कार्यों में उपयोग किया जा सकता है, जिससे मीठे पानी पर निर्भरता घटाई जा सकती है।

खरीफ की बुवाई का लक्ष्य (हैक्टेयर)

बाजरा-1.25 लाख
सब्जी-30 हजार
कपास-25 हजार
ज्वार-14000
तिल-2000
ग्वार-2000

Updated on:
07 Jul 2026 11:09 am
Published on:
07 Jul 2026 11:08 am