अलवर जिले के लिए 2 तारीख बेहद ही अशुभ है, 2 तारीख को अलवर में अप्रिय घटनाएं होती है।
अलवर. अलवर के लिए 2 तारीख शुभ नहीं है। यह बात कोई ज्योतिष नहीं, तथ्य और घटनाएं कह रही है। जी हां! अलवर के लिए 2 तारीख शुभ नहीं होना हम इसलिए कह रहे हैं कि हर माह की 2 तारीख को अलवर में अप्रिय घटनाएं हुई है। अलवर में जनवरी से लेकर मई तक 2 तारीख को कुछ न कुछ अशुभ ही हुआ है। तो आइए हम आपको तथ्यों से समझाते हैं कि क्यों 2 तारीख अलवर के लिए अशुभ है।
2 मई 2018
2 मई की घटना शायद ही अलवर वासी कभी भूल पाएंगे। 2 मई को अलवर के इतिहास का सबसे भयंकर तूफान आया था। जिसने पेड़, खंबे, दुकान, मकान, पार्क सहित सब कुछ उजाड़ दिया। न तो इस तूफान के आगे कारों से भरा ट्रक टिक पाया, न हीं इसके सामने इंसान का कोई बस चला। इस तूफान की वजह से अलवर शहर अंधेरे में डूब गया। शनिवार को चौथे दिन भी शहर में बिजली नहीं आ पाई। इसके साथ ही अलवर के लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
2 अप्रेल 2018
2 अप्रेल को भी अलवर देशभर में सुर्खियों में रहा था। वजह थी दलित आंदोलन। दलित आंदोलन की वजह से अलवर को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। आंदोलन के दौरान शहर में चारों ओर तोडफ़ोड़ हुई। पुलिस पर पत्थर बरसाए गए। पटरीयां उखाड़ी गई। रेल रोकी गई। दलितों के भारत बंद के कारण अलवर को करोड़ों का आर्थिक नुकसान भी हुआ।
2 मार्च 2018
अलवर के लिए 2 मार्च भी अशुभ दिन था। अलवर के भिवाड़ी में 2 मार्च को ही दलित किशोर की हत्या कर दी गई। हत्या के बाद समाज में आक्रोश का माहौल था। भिवाड़ी व आसपास के क्षेत्रों में जाम लगाया गया। टायर जलाए गए। इसके साथ ही कई पदाधिकारी धरने पर भी बैठे थे।
2 फरवरी 2018
अलवर के लिए 2 फरवरी का दिन भी अशुभ था। इस दिन अलवर के सपूत सैनिक राजेंद्र सिंह कुपवाड़ा में शहीद हो गए थे। राजेन्द्र की मौत हिमस्खलन की वजह से हुई थी। इसके बाद सेना की ओर से परिवार को इसकी सूचना दी गई। समाचार सुनते ही जिले में शोक छा गया। वहीं 2 फरवरी को अलवर वासियों को हैवान बेटे का सच भी पता चला था। दरअसल, 2 अप्रेल को एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक शिक्षक पुत्र अपनी 82 वर्षीय मां को बेरहमी से पीटता हुआ नजर आ रहा था। इसके कुछ दिनों बाद उसकी बुजुर्ग मां की मौत हो गई थी।
2 जनवरी 2018
2 जनवरी भी अलवर वासियों के लिए काफी दर्दभरा व अशुभ रहा था। 2 जनवरी को एक दुर्घटना में बच्चे को छोडकऱ अलवर के एक ही परिवार के सभी सदस्यों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद से अलवर में नववर्ष की खुशी गम में बदल गई। परिवार बिछड़ जाने के बाद 9 साल का पीयूष अकेला रह गया। पीयूष ने इस दुर्घटना में अपनी बहनों व माता-पिता को खो दिया था। अब पीयूष अपने दादा-दादी के साथ रह रहा है।
नोट:- उपर घटनाओं का जिक्र घटनाओं व तथ्यों के मुताबिक किया है, इसे अंधविश्वास के तौर पर बिल्कुल न लें।