अंबिकापुर

Action on private schools: अंबिकापुर के इन 2 प्राइवेट स्कूलों पर चला प्रशासन का डंडा, तय दुकानों से महंगी किताबें खरीदने का बनाया था दबाव

Action on private schools: दोनों स्कूलों द्वारा अपने सूचना पटल पर पुस्तक सूची का प्रदर्शन नहीं किया गया था, वहीं तय दुकानों से ही किताबें लेने किया गया था, एडमिशन शुल्क में भी हर साल मनमाने रूप से की गई थी बढ़ोतरी
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Updated: 12 Apr 2026, 1:17 PM IST
Action on private schools
Birla open mind international and Montfort school Ambikapur (Photo- Patrika)

अंबिकापुर. अंबिकापुर एसडीएम और जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा ने शुक्रवार को शहर के मोंट फोर्ट स्कूल और बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल (Action on private schools) का निरीक्षण किया गया। इस दौरान पाया गया कि स्कूल प्रबंधनों द्वारा अभिभावकों पर तय दुकानों से ही किताबें-कॉपियां खरीदने का दबाव बनाया जा रहा था। मोंट फोर्ट में आशा बुक डिपो और राणा ब्रदर्स से बंडल में किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया गया। वहीं बिरला ओपन माइंड स्कूल में किताब घर से सेट खरीदने का दबाव पाया गया।

कई अभिभावकों ने बताया कि उन्हें अलग-अलग किताबें लेने की अनुमति नहीं दी गई। दोनों स्कूलों में पुस्तक सूची का प्रदर्शन सूचना पटल पर नहीं किया गया। यूनिफॉर्म भी तय दुकानों से खरीदने के निर्देश दिए। डीईओ ने दोनों स्कूल प्रबंधन को 2 दिन में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। संतोषजनक जवाब (Action on private schools) नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

Action on private schools: नियमों का उल्लंघन

जांच में सामने आया कि कक्षा नर्सरी से 8वीं तक अधिकांश किताबें (Action on private schools) निजी प्रकाशकों की हैं। 9वीं से 12वीं में भी कुछ प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लागू हैं, जो सीबीएसई बायलॉज 2018 के क्लॉज 2.4.7 का उल्लंघन है।

अवैध शुल्क बढ़ोतरी

मोंटफोर्ट स्कूल (Action on private schools) में हर साल एडमिशन फीस लेने और 5 से 14 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की बात सामने आई। वहीं बिरला ओपन माइंड स्कूल में रजिस्ट्रेशन, एडमिशन, सिक्योरिटी और फील्ड ट्रिप, वर्कशॉप के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला गया।

अभिभावकों ने की थी शिकायत

प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों ने प्रशासन से शिकायत की थी कि स्कूल प्रबंधन द्वारा हर साल एडमिशन फीस और मंथली फीस में मनमानी बढ़ोतरी (Action on private schools) की जाती है। वहीं हर साल एनसीईआरटी की जगह सिलेबस चेंज कर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें चलाते हैं।

यही नहीं, तय दुकानों से ही महंगी किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव बनाया जाता है। शिकायत के बाद डीईओ ने स्कूल प्रबंधकों की बैठक ली थी, इसमें इस बात की पुष्टि हुई थी कि शहर के अधिकांश बड़े प्राइवेट स्कूल इन कार्यों में लिप्त हैं।

Updated on:
12 Apr 2026, 1:17 PM IST
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