Sanjay Park: संजय पार्क में आवारा श्वानों के हमले से 15 हिरणों की मौत का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संवेदनशील घटना को राज्य शासन ने गंभीरता से लेते हुए तत्काल उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।
Ambikapur Sanjay Park Deer Deaths: संजय पार्क में आवारा श्वानों के हमले से 15 हिरणों की मौत का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संवेदनशील घटना को राज्य शासन ने गंभीरता से लेते हुए तत्काल उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। घटना 20 और 21 मार्च की दरम्यानी रात की बताई जा रही है, जब संरक्षित बाड़े में घुसे आवारा श्वानों ने 31 हिरणों के झुंड पर हमला कर दिया, जिसमें 15 हिरणों की मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, गठित जांच समिति की अध्यक्षता सीसीएफ सरगुजा एवं सीसीएफ वाइल्ड लाइफ द्वारा की जाएगी। समिति को पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही समिति को संजय पार्क की सुरक्षा व्यवस्था का आकलन कर भविष्य के लिए आवश्यक सुझाव देने को भी कहा गया है।
घटना के बाद विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने पर डिप्टी रेंजर सहित पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि संबंधित रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा, संजय पार्क का संचालन कर रही वन प्रबंधन समिति शंकरघाट को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
कराई गई बाड़े की मरम्मत
वन विभाग द्वारा पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए त्वरित कदम उठाए गए हैं। हिरणों के बाड़े की मरम्मत कराई गई है ताकि भविष्य में कोई भी बाहरी जानवर अंदर प्रवेश न कर सके। साथ ही रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था को भी बढ़ा दिया गया है और निगरानी के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है। डीएफओ ने बताया कि पार्क में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके और इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
अभी नहीं भेजा गया जांच के लिए विसरा
हिरणों की मौत का मामला शनिवार का है। पीएम के दौरान विसरा प्रिजर्व किया गया था। लेकिन घटना के तीसरे दिन भी विसरा जांच के लिए नहीं भेजा जा सका है। डीएफओ का कहना है कि विसरा को जांच के लिए रायबरेली भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सके और किसी अन्य आशंका को भी दूर किया जा सके।
‘बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश’
इधर, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। युवा कांग्रेस ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। जिलाध्यक्ष विकल झा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने वनमंडलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन को 7 दिनों का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और घेराव किया जाएगा।