
अंबिकापुर। नशे में हमेशा डूबे रहने वाले दंपती ने 8 और 9 वर्ष की उम्र में 2 मासूम बेटियों को छोड़ दिया था। रिद्धि-सिद्धि (Riddhi-Siddhi story) (बदला हुआ नाम) नाम की मासूमों का बचपन बालिका गृह की चारदीवारी में सिमट गया। दोनों ने 2 साल से अधिक समय अंबिकापुर स्थित एमएसएसव्हीपी द्वारा संचालित बालिका गृह (MSSVP Ambikapur) में बिताया। इस दौरान उन्होंने माता-पिता की कमी तो महसूस की, लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी। अंतत: वह दिन आ गया जब उन्हें नए माता-पिता मिल गए। इटली के दंपती ने दोनों को विधिवत गोद लिया। नए माता-पिता को पाकर दोनों के चेहरे खिल उठे। इसमें मामले में खास बात यह रही कि इटली जाने से पहले रिद्धि-सिद्धी ने 3 माह तक अंग्रेजी सीखी, ताकि आगे बातचीत करने में उन्हें परेशानी न हो।
बता दें कि इटली निवासी एलिना पेशे से टूरिस्ट गाइड और उनके पति फेड्रिको एलिको इलेक्ट्रीशियन हैं। दोनों ने अंबिकापुर आकर रिद्धि-सिद्धि को विधिवत गोद लिया। अब रिद्धि और सिद्धि नए माता-पिता के साथ इटली (Riddhi-Siddhi in Italy) में नई जिंदगी शुरू करेंगी। दोनों बहनें करीब ढाई वर्ष पहले बालिका गृह पहुंची थीं। संचालिका मीरा शुक्ला के अनुसार उनके माता-पिता नशे के आदी थे।
बच्चियों को छोड़ दिए जाने के बाद बालिका गृह की टीम ने उनके परिजनों की तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। ऐसे में बालिका गृह (MSSVP Balika Griha) ही दोनों बहनों का घर बन गया। बचपन की इस मुश्किल घड़ी में दोनों ने साथ नहीं छोड़ा। एक-दूसरे का सहारा बनकर दोनों बहनें बड़ी होती रहीं। पढ़ाई की, नए सपने देखे और अपने भविष्य का इंतजार किया।
दोनों बच्चियों को दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया के लिए कारा की वेबसाइट पर पंजीकृत किया गया था। इसी माध्यम से इटली के दंपती ने दोनों बहनों को गोद लेने में रुचि दिखाई। निर्धारित प्रक्रिया के तहत दंपती (Italy Couple) पहली बार मई 2026 में अंबिकापुर पहुंचे। दोनों बच्चियों से मुलाकात कराई गई। अपर कलेक्टर ने भी दंपती और बच्चियों से बातचीत की।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण था बच्चियों की सहमति। दोनों ने नए माता-पिता के साथ जाने और उनके साथ रहने की इच्छा जताई। इसके बाद दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी और 10 अगस्त को प्रशासन ने दोनों बहनों को दंपति को सौंप दिया।
इटली जाने से पहले रिद्धि-सिद्धि को नए वातावरण के लिए तैयार किया गया। दंपती की इच्छा और भविष्य की जरूरत को देखते हुए दोनों को करीब 3 माह तक अंग्रेजी की कक्षाएं (English Class) कराई गईं। भाषा सीखते हुए दोनों बहनों ने अपने नए जीवन की तैयारी की। बालिका गृह से निकलकर अब दोनों बहनें इटली में नए सपने पूरा