Ajab-Gajab: इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और वल्र्ड रिकॉड्र्स इंडिया में दर्ज करा चुके हैं नाम, अंबिकापुर के रहने वाले लाल विजय श्रीवास्तव का कारनामा
अंबिकापुर। यदि कोई कहे कि वह खुली आखों से कई मिनट तक तपती दोपहर में सूर्य को देख सकता है। शायद आप विश्वास नहीं कर पाएंगे, क्योंकि आम व्यक्ति ठीक से 2-4 सेकेंड भी बिना पलक झपकाए सूर्य से आंख नहीं मिला सकता। लेकिन अंबिकापुर के मनेंद्रगढ़ मार्ग पर राइस मिल रोड निवासी लालविजय श्रीवास्तव (Lal Vijay Shrivastava) ने 2 बार यह कारनामा (Ajab-Gajab) कर दिखाया है। खुली आंखों से सूरज को चुनौती देकर उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड तथा World Records India में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराया है। 12.53 मिनट तक सूर्य को देख चुके लालविजय को अब वल्र्ड रिकॉड्र्स इंडिया संस्था द्वारा जून माह में जीनियस इंडियन अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।
लाल विजय श्रीवास्तव उर्फ लाल जी ने अपनी साधना और आंखों की अद्वितीय शक्ति से वह कर दिखाया है, जिसे विज्ञान भी अचरज (Miracle) से देख रहा है। लालविजय छत्तीसगढ़ के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने सूर्य को इतनी देर तक खुली आंखों से देखा है।
उन्होंने मार्च 2026 में 33 डिग्री तापमान में 12.53 मिनट तक लगातार सूर्य को देखकर ‘वल्र्ड रिकॉड्र्स इंडिया’ में नाम दर्ज कराया। उन्होंने 18 दिसंबर 2025 में खुद के द्वारा ही बनाए गए 12.52 मिनट के रिकॉर्ड को तोड़ा।
इस दौरान उन्होंने अपना नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराया था। अब वल्र्ड रिकॉड्र्स इंडिया द्वारा 6 जून को अहमदाबाद के प्राइड प्लाजा होटल में '10वे जीनियस इंडियन अचीवर्स अवार्ड' से सम्मानित किया जाएगा। इस दौरान वे देशभर के चुनिंदा 50 रत्नों के बीच लाइव परफॉर्मेंस भी देंगे।
पत्रिका से बातचीत के दौरान लाल विजय श्रीवास्तव ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य अमेरिका बुक ऑफ रिकॉड्र्स और लंदन बुक ऑफ रिकॉड्र्स (India Book of Records) में नाम दर्ज कराना है। उनका कहना है कि वे अंबिकापुर और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व पटल पर लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल मेरी नहीं, सरगुजा की अस्मिता की है।
लाल विजय श्रीवास्तव ने शहर सहित प्रदेश के जनप्रतिनिधियों व व्यापारियों से आर्थिक मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chhattisgarh CM) के नेतृत्व में प्रतिभाओं को निखारने का जो संकल्प है, मुझे विश्वास है कि उस 'सुशासन' की छांव में आर्थिक अभाव मेरी उड़ान नहीं रोक पाएगा। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि जब विश्व पटल पर रिकॉर्ड बने तो उसमें अंबिकापुर के हर नागरिक का अंश हो।