संयुक्त पंजीयक के आदेश पर सदस्यों ने हटाया, लुंड्रा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं रामदेव राम, भाजपा का हुआ कब्जा
अंबिकापुर. जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर के वर्तमान अध्यक्ष को संयुक्त पंजीयक न्यायालय के आदेश पर गुरुवार को आयोजित बोर्ड की बैठक में एक तिहाई सदस्यों की उपस्थिति में पद से हटा दिया गया। उनपर बोर्ड के आदेश के खिलाफ 25 संविदा कर्मचारियों की भर्ती व नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं देने का आरोप था।
बोर्ड की बैठक से अध्यक्ष व दो सदस्य बिना उपस्थिति पंजीयक में हस्ताक्षर किए ही वहां से चले गए। इसके बाद 4 सदस्यों की उपस्थिति में भाजपा समर्थित बैंक के सदस्य लाल संतोष सिंह को संयुक्त पंजीयक की उपस्थिति में सर्वसम्मति से कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया। गौरतलब है कि रामदेव राम लुंड्रा विधानसभा से पूर्व में कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं।
जिला सहाकारी केंद्रीय बैंक के वर्तमान अध्यक्ष रामदेव राम पर संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं के आदेश के खिलाफ जाते हुए बैंक में 25 कर्मचारियों की संविदा भर्ती किए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद से ही बोर्ड के सदस्यों में उन्हें हटाने की कवायदें तेज कर दी गई थी।
बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय पर बाद में असहमति जताते हुए उसे पलटने व आए दिन सीईओ का प्रभार अपने चहेते कर्मचारियों को दिए जाने का आरोप भी बैंक के कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा रामदेव राम पर लगाया गया था। इस मामले में संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं सरगुजा संभाग द्वारा नोटिस जारी करते हुए मामले में स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
रामदेव राम की ओर से प्राप्त जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की वजह से संयुक्त पंजीयक ने 2 अप्रैल को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक को आदेश जारी किया था।
संयुक्त पंजीयक ने अपने आदेश में लिखा था कि ७ सितंबर 2017 द्वारा अध्यक्ष जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित को बैंक के स्टॉफ उप समिति की बैठक दिनांक 13 जून 2017 को सर्वसहमति से निर्णय लेने तथा इसके बाद प्रत्येक पृष्ठ पर असहमत लिखते हुए दिनांक 21 जून 2017 द्वारा स्टॉफ उप समिति के निर्णयों के क्रियान्वयन करने से मुख्य कार्यपालन अधिकारी को रोके जाने पर स्पष्टीकरण जारी किया गया था।
इसका जवाब अध्यक्ष द्वारा 21 सितम्बर 2017 को प्रस्तुत किया था, जो समाधान कारक नहीं पाया गया तथा कार्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 53(ख) के अंतर्गत पत्र जारी करते हुए 13 नवम्बर 2017 को नोटिस जारी किया गया। इसका जवाब अध्यक्ष द्वारा 26 नवम्बर 2017 को दिया गया था।
जवाब का अवलोकन किया गया जो संतोषप्रद नहीं पाया गया। इसके आधार पर 15 दिवस के अंदर रामदेव राम को अध्यक्ष पद से हटाये जाने का आदेश जारी किया था। संयुक्त पंजीयक के आदेश पर गुरुवार को सहकारी बैंक के बोर्ड मेम्बर की बैठक बुलाई की गई थी। इसमें न्यायालय के आदेश पर चार सदस्यों ने सर्वसम्मिति से वर्तमान अध्यक्ष को हटाने का निर्णय लिया।
अध्यक्ष पद से हटाने के बाद वर्तमान अध्यक्ष रामदेव राम की जगह उपाध्यक्ष लाल संतोष प्रताप सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान सहकारी बैंक के निर्वाचित सदस्य राजा राम भगत, अखिलेश सोनी, संतोष सिंह व अजय गोयल उपस्थित थे। घोषणा के बाद सभी ने लाल संतोष सिंह को मिठाई खिलाकर बधाई दी। इस दौरान भाजपा के ललन प्रताप सिंह, प्रशांत त्रिपाठी, जन्मजेय मिश्रा, विनोद हर्ष, विकास वर्मा, सौरभ चखियार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
कर्तव्यों के निर्वहन में उपेक्षा का लगा था आरोप
संयुक्त संचालक निर्मल तिग्गा ने बताया कि अध्यक्ष रामदेव राम पर अधिरोपित किए गए कर्तव्यों का निर्वाह करने में घोर उपेक्षा की गई है और उनके कृत्य से बैंक को वित्तीय हानि हुई है। इससे बैंक की छवि भी धूमिल हुई है। इस कारण बैंक हित में अध्यक्ष को हटाए जाने का निर्णय लिया गया है।
आधे से अधिक सदस्य रहे अनुपस्थित
सहकारी बैंक में कुल 11 निर्वाचित सदस्य हैं। इसमें से एक सदस्य का निर्वाचन अध्यक्ष पद के लिए किया जाता है। वह भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।
गुरुवार को आयोजित बोर्ड की बैठक में संयुक्त पंजीयक, बैंक के सीईओ, निर्वाचित सदस्यों में रामदेव राम, एसएस सिंहदेव, मंजू सिंहदेव, राजाराम भगत, अखिलेश सोनी, संतोष सिंह, अजय गोयल बैठक में उपस्थित थे। जबकि सरोज पैकरा, शिवनाथ सिंह, रमाकांत पाण्डेय व नरेश राजवाड़े बैठक में आए ही नहीं थे।
बैठक में चूंकि रामदेव राम पर आरोप लगाए गए थे, इसकी वजह से उन्हें बैठक में वोटिंग का अधिकार प्राप्त नहीं था। बैठक को विधिसम्मत बताते हुए एसएस सिंहदेव, मंजू सिंहदेव व रामदेव राम उठकर चले गए। इसके बावजूद बैठक में चार सदस्य उपस्थित थे, जो सहकारी एक्ट के तहत कोरम को पूरा करते थे। इसकी वजह से अध्यक्ष को हटाने का निर्णय लिया गया।