
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र निवासी एक युवक की मां की मौत 1 वर्ष पूर्व हो गई थी, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पिता (Son murdered father) समेत कोई भी उसका दशगात्र कार्यक्रम नहीं करा पाया था। 6 माह पूर्व युवक ने अपने पिता से कहा कि वह अपने हिस्से की जमीन बेचकर मां का दशगात्र कार्यक्रम कराएगा। उसे उसके हिस्से की जमीन चाहिए। इस पर पिता ने मना कर दिया। इससे गुस्साए बेटे ने पिता की हाथ-मुक्के से पहले तो बेदम पिटाई की, फिर गले में पेचकस घोंप कर हत्या कर दी थी। रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले में सप्तम अपर सत्र न्यायालय अंबिकापुर ने आरोपी पुत्र को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम कुनमेरा गुड़ीपारा निवासी आरोपी धरम सिंह (40) की मां की करीब 1 वर्ष पहले मौत (Mother death) हो गई थी। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण परिवार उनका दशगात्र कार्यक्रम नहीं कर पाया था। घटना के करीब 6 माह बाद 7 मई 2026 की दोपहर करीब 3 बजे धरम सिंह ने अपने पिता रामबिलास सिंह से कहा कि वह अपने हिस्से की जमीन बेचकर मां का दशगात्र कार्यक्रम करना चाहता है।
इस पर पिता ने जमीन बेचने से मना कर दिया। इस पर धरम सिंह गुस्से में आ गया और हाथ-मुक्के, लात व कोड़े से पिता की बेदम पिटाई कर दी। इसके बाद उसके गले में लोहे का पेचकस घोंप कर हत्या (Father brutal murder) कर दी थी। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी माना।
मामले की सुनवाई सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत (Ambikapur Court) चल रही थी। 3 नवंबर न्यायाधीश ने पिता की हत्या के आरोपी धरम सिंह को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास और 2 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रकाश मणि त्रिपाठी ने मामले की पैरवी की।