अंबिकापुर

एसपी ने जिस आरोपी को किया था जिलाबदर, वह भाजपा मंत्री की नामांकन रैली में घूमता रहा खुली जीप में

घर में घुसकर मारपीट, प्राणघातक हमला, बलवा जैसे 15 गंभीर मामले का आरोपी रह चुका है प्रभाकर सिंह कुशवाहा, 8 जिले की सीमा से बाहर खदेडऩे का था आदेश

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Prabhakar Singh Kushwaha

अंबिकापुर. किसी के घर में घुसकर मारपीट, प्राण घातक हमला, बलवा जैसे 15 प्रकरण का आरोपी कोरिया सहित 8 जिले की सीमा से बाहर खदेडऩे के आदेश के ठीक 8वें दिन 1 नवंबर को भाजपा की नामांकन रैली में बाकायदा खुली जीप में बैठकर पहुंचा था।

नामांकन रैली में श्रम खेल एवं युवा कल्याण मंत्री भइयालाल राजवाड़े, संसदीय सचिव चंपादेवी पावले, मनेंद्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष तीरथ गुप्ता, पूर्व नपाध्यक्ष शैलेष शिवहरे सहित भाजपा संगठन के कई बड़े पदाधिकारी मौजूद थे।

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पुलिस अधीक्षक ने विधानसभा चुनाव को मद्देनजर आरोपी प्रभाकर सिंह कुशवाहा पिता राजेंद्र प्रसाद कुशवाहा गढ़ेलपारा थाना बैकुंठपुर निवासी के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 5(ख) के प्रावधानों के तहत आपराधिक प्रकरण वार प्रतिवेदन सौंपा था।

इसमें बैकुंठपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2004 से आपराधिक गतिविधि में शामिल रहने, पिछले 12 साल से आरोपी अपने साथियों के साथ घर में घुसकर मारपीट, प्राण घातक हमला, बलवा को अपना पेशा बनाने का उल्लेख किया गया था।

प्रतिवदेन में यह भी लिखा गया था कि आरोपी के लिए मारपीट, शीलभंग, पशु क्रूरता व हत्या का प्रयास जैसे अपराध को अंजाम देना आम बात हो गई है। इससे राज्य सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

मामले में जिला दण्डाधिकारी कोरिया ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपी 2004 से 2016 तक लगातार आपराधिक प्रकरणों में संलिप्त है। आरोपी की जांच प्रतिवेदन में 15 अपराधिक प्रकरणों का उल्लेख किया गया है।

उसे छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3 व 5 के तहत आरोपी को तीन महीने तक कोरिया सहित सूरजपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, बिलासपुर व कोरबा की सीमा से निष्कासित (जिला बदर) करने का आदेश दिया गया है। आदेश के प्रभावशील अवधि में जिला दण्डाधिकारी की अनुमति के बिना आठ जिले की सीमा के अंदर प्रवेश बाध्य होगा।


25 अक्टूबर को आदेश दिया, 1 नवंबर को नामांकन रैली में पहुंचा
जिला दण्डाधिकारी ने 25 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में कहा है कि पुलिस अधीक्षक ने अपने प्रतिवेदन में कुल १५ प्रकरणों का उल्लेख किया है। इसमें आरोपी ने गुण्डागर्दी कर आतंक का माहौल बनाकर रखा है। पढऩे-लिखने वाले छोटे बच्चे, महिलाएं, गरीब निम्न तबके लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

समाज में गुण्डागर्दी का वातावरण निर्मित कर रखा है, जिससे समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अपने कृत्य में संलिप्त रहकर आपराधिक कृत्यकोरित कर आम जनता को आतंकित एव भयभीत कर रहा है, जिससे लोक व्यवस्था के पालन में निरंतर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस कारण पुलिस अधीक्षक ने प्रतिवेदन में लेख किया है लोकहित में आरोपी को कोरिया जिला से निष्कासित किया जाए।

वहीं दाण्डिक प्रकरण में संलग्र समस्त दस्तावेजों का अवलोकन से यह पुष्टि होती है कि आरोपी वर्ष 2004 से 2016 तक लगातार आपराधिक प्रकरणों में संलिप्त है। समस्त अभियोजन साक्षियों की उपस्थिति नहीं होने से एक पक्षीय कार्रवाई कर पुलिस अधीक्षक व थाना प्रभारी के प्रतिवेदन को आधार माना गया है। बावजूद आरोपी भाजपा की नामांकन व शक्ति प्रदर्शन रैली में १ नवम्बर को मौजूद था।


एसपी ने आरोपी का नाम सुनते ही काट दिया फोन
एसपी कोरिया विवेक शुक्ला की तरफ से गए प्रतिवेदन पर कलक्टर कोरिया ने 25 अक्टूबर 2018 को ही प्रभाकर कुशवाहा को जिला बदर करने का आदेश जारी कर दिया था।

बावजूद इसके वह 1 नवंबर को नामांकन रैली में शामिल हुआ, जब इस संबंध में एसपी से फोन पर पक्ष लेने बात की गई, तो वे आरोपी प्रभाकर कुशवाहा का नाम सुनते ही हड़बड़ा गए और चेक करवाने की बात कहकर फोन काट दिया।

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Published on:
06 Nov 2018 03:17 pm
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