अंबिकापुर

Ambikapur News: किसानों को डबल झटका! अर्नब चक्रवात में तो डूबी ही, हाथियों ने भी रौंद डाली 15-20 एकड़ में लगी फसल

Elephants Panic: सूरजपुर जिले के प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम कोरंधा में हाथियों ने मचाया उत्पात, धान के अलावा शकरकंद व टमाटर की फसलों को पहुंचाया नुकसान
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Updated: 30 Oct 2026, 3:06 PM IST
Elephants havoc in Pratappur region
Ambikapur news, हाथियों द्वारा हुए फसल के नुकसान को दिखाते किसान (Photo- Patrika)

अंबिकापुर। पिछले 2 दिनों में अर्नब तूफान (Arnab Cyclone) के असर से किसानों के खेतों में खड़ी धान, टमाटर समेत अन्य फसलें तो तबाह हुई हीं, लेकिन सूरजपुर जिले के प्रतापपुर तहसील अंतर्गत ग्राम कोरंधा में किसानों को डबल झटका लगा है। अर्नब चक्रवात के असर से यहां के किसानों के खेत में पकी धान की फसल पानी में जहां डूब गईं, वहीं 15-20 हाथियों के दल ने सप्ताहभर के भीतर धान, टमाटर और शकरकंद की फसल को नुकसान पहुंचाया। इसे लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। किसान अब प्रशासन से मुआवजे की आस में हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें नुकसान की तुलना में काफी कम मुआवजा दिया जाता है।

प्रतापपुर तहसील अंतर्गत ग्राम कोरंधा के किसानों सखीचंद, लोकनाथ , द्वारिका तिवारी, महेंद्र, बच्चालाल, यशवंत, शिवनाथ, कवलसाय, नोहर सिंह समेत अन्य किसानों अन्य 8-10 लोगों के खेतों में लगी करीब 15 से 20 एकड़ से अधिक धान की फसल को हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। वहीं नोहर सिंह के खेतों में लगे शकरकंद की फसल को हाथी (Elephants crushed crops) चट करने के अलावा रौंद डाला।

किसानों का कहना है कि अर्नब चक्रवात के असर से खेत में पक कर तैयार धान की फसल पानी में बर्बाद हो चुकी है, जो फसलें बची थीं, उसे हाथियों ने रौंद डाला। किसानों का कहना है कि पिछले 8-10 दिनों से 15-20 हाथियों का दल कोरन्धा-सोनगरा जंगल से निकलकर खेतों और गांव की बस्ती बाड़ी तक पहुंच जा रहे हैं। हाथियों का दल (Elephants in Pratappur region) रात के समय आता है और फसलों को नुकसान पहुंचाकर चला जाता है।

Ambikapur news, धान की फसल हो गई चौपट (Photo- Patrika)

Surajpur Farmers: अच्छी थी धान की फसल

हाथियों से पीडि़त किसानों का कहना है कि इस बार धान की फसल काफी अच्छी हुई थी। कटाई का समय भी नजदीक आ गया था, लेकिन पहले हाथियों और फिर अर्नब चक्रवात के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से जो मुआवजा (Crops Compensation) दिया जाता है, वह नुकसान की तुलना में काफी कम होता है। उनका कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर धान समेत अन्य फसल लगाई थी।

रतजगा करने को विवश

किसानों का कहना है कि गांव की ओर हाथियों के आ जाने से ग्रामीणों में दहशत (Elephants panic) का आलम है। लोग रतजगा करने को विवश हैं। वे आग जलाकर और शोर मचाकर हाथियों से अपनी सुरक्षा करते हैं। उन्होंने वन विभाग से हाथी भगाओ दस्ता को गांव में तैनात करने, टॉर्च-पटाखे उपलब्ध कराने तथा फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिलाने की मांग की है।

Updated on:
30 Oct 2026, 3:06 PM IST
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