Elephant attack: महुआ पेड़ के पास ही तिरपाल लगाकर सो रहा था परिवार, हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल मां व 8 माह की मासूम बेटी को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कराया गया भर्ती
अंबिकापुर. Elephant attack: उदयपुर थाना क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर में पति-पत्नी अपने 2 मासूम बच्चे के साथ महुआ बीनने पेड़ के पास तिरपाल लगाकर सोए थे। इसी बीच रविवार की अलसुबह वहां आ धमके हाथी ने उनपर हमला कर दिया। हमले में दुधमुंही बेटी व उसकी मां गंभीर रूप से जख्मी हो गई हंै। जबकि पिता को कमर में चोट आई है। सूचना पर वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर घायलों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र उदयपुर में भर्ती कराया। यहां स्थिति को गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने मां-बेटी को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। यहां दोनों का इलाज जारी है।
उदयपुर थाना क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर निवासी दुर्गा गोंड़ ने महुआ बीनने के लिए अपने घर से लगे पेड़ के पास तिरपाल लगाकर झोपड़ी बनाई थी। शनिवार की रात वह तिरपाल के नीचे पत्नी हारमती, 8 माह के दुधमुंही बच्ची अंजना व 4 साल के बेटे शिवशंकर के साथा सोया था।
देर रात करीब 3 बजे झोपड़ी के पास अचानक एक हाथी आ गया, यह देखकर सभी डर गए। वे भागने की तैयारी कर ही रहे थे कि मां की गोद में रही बेटी रोने लगी। इस दौरान हाथी ने सभी पर हमला कर दिया।
हाथी द्वारा सूड़ से उठाकर पटके जाने से हारमती व उसकी दुधमुंही बच्ची गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। वहीं पिता-पुत्र को मामूली चोट आई है।
वन विभाग ने अस्पताल में कराया भर्ती
सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस से उदयपुर सामुदायिक अस्पताल में भर्ती कराया।
दुधमुंही बच्ची व उसकी मां की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर रेफर कर दिया। यहां दुधमुंही बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती कराया गया है। वहीं उसकी मां के सीने में गंभीर चोटें है।
दो हाथियों का था दल
दो हाथी का दल सप्ताहभर से उदयपुर वन परिक्षेत्र में विचरण कर रहा है। दोनों हाथी एक साथ थे, लेकिन दो दिन से दोनों अलग-अलग दिशाओं में घूम रहे हैं। एक हाथी लखनपुर वन परिक्षेत्र की ओर गया है तो दूसरा फतेहपुर की ओर से होते हुए तारा प्रेमनगर के जंगल की ओर रवाना हो गया है।
वन विभाग ने दी थी हाथी की सूचना
घटना से क्षेत्र में हडक़ंप मचा हुआ है। वन अमले द्वारा ग्रामीणों को लगातार समझाइश दी जा रही है, लेकिन लोग बात मानने की जगह लापरवाही कर रहे हैं। हाथियों के हमले से घायल दुर्गा के परिवार को भी जंगल में हाथी विचरण की सूचना दी गई थी, लेकिन वह नहीं माना और पूरा परिवार हाथी की चपेट में आ गया।