अंबिकापुर

फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर कमिश्नर दफ्तर में बना था बाबू, प्रमोशन भी हो गया, 38 साल बाद सामने आई धोखाधड़ी

Fraud: विभागीय जांच के बाद कोतवाली पुलिस ने अधीक्षक के खिलाफ धोखाधड़ी का दर्ज किया अपराध
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फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर कमिश्नर दफ्तर में बना था बाबू, प्रमोशन भी हो गया, 38 साल बाद सामने आई धोखाधड़ी
Fraud

अंबिकापुर. सरगुजा आयुक्त कार्यालय में पदस्थ अधीक्षक द्वारा फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने का मामला सामने आया है। अधीक्षक ने 1982 में गोंड़ जाति का प्रमाण पत्र (Fake certificate) लगाकर आयुक्त कार्यालय में द्वितीय श्रेणी लिपिक के पद पर नौकरी शुरू की थी। जबकि वह सामान्य जाति का है। प्रमोशन के बाद आयुक्त कार्यालय में वह फिलहाल अधीक्षक है। (Fraud case)

फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने की शिकायत अजाकस ने विभाग में की थी। विभाग द्वारा मामला छत्तीसगढ़ उच्चस्तरीय छानबीन कार्यालय को भेजा गया था। जांच में गोंड़ जाति होना गलत पाया गया है। आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त ने इसकी शिकायत कोतवाली में दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर लिया है।


पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार शहर के रामाशीष सिंह आयुक्त कार्यालय में अधीक्षक के पद पर पदस्थ हैं। कुछ समय पहले ही ऑडिटर पद से इनका प्रमोशन हुआ था। अजाकस द्वारा विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई थी की आयुक्त कार्यालय के अधीक्षक रामाशीष सिंह पिता स्व. भागीरथी सिंह सामान्य जाति के हैं।

जबकि ये गोंड़ जाति का प्रमाण पत्र लगाकर 38 साल से नौकरी कर रहे हैं। शिकायत पर विभाग ने जांच के लिए छत्तीसगढ़ उच्चस्तरीय छानबीन कार्यालय को मामला भेज दिया था। विभाग द्वारा इनके दस्तावेज की जांच कराई गई तो पता चला कि रामाशीष ङ्क्षसह का गोंड़ जाति का प्रमाण पत्र नहीं बना है।

जांच के बाद इसकी रिपोर्ट आयुक्त कार्यालय को सौंप दी गई थी। आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त महावीर राम ने इसकी शिकायत कोतवाली में दर्ज कराई है। पुलिस ने अधीक्षक के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।


1982 में शुरू की थी नौकरी
रामाशीष ङ्क्षसह की 18 जनवरी 1982 को द्वितीय श्रेणी लिपिक के पद पर अंबिकापुर आयुक्त कार्यालय में नौकरी लगी थी। नौकरी के दौरान उन्होंने गोंड़ जाति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। उसने खुद को जशपुर जिले के ग्राम दुलदुला निवासी बासु का परिजन बताया था, जो कि जांच में गलत पाया गया है।

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Updated on:
04 Feb 2020 06:37 pm
Published on:
04 Feb 2020 06:37 pm