अंबिकापुर

एमएस बोले- मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टर सिर्फ निजी अस्पताल में ईमानदारी से करते हैं काम, यहां नहीं

Doctors News: मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Medical college hospital) में मरीज को भर्ती करने के बाद सुध लेना भूल जाते हैं डॉक्टर, समुचित उपचार नहीं मिलने से विवशता में मरीज को निजी अस्पताल (Private hospital) ले जाते हैं परिजन, सेटिंग के साथ मरीजों के साथ की जा रही है साजिश
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Medical college hospital

अंबिकापुर. Doctor's News: मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में सारी व्यवस्था होने व विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के बावजूद भी अगर मरीज को सही समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है तो यह चिंता का विषय है। ऐसा ही एक मामला शनिवार की दोपहर देखने को मिला। सड़क दुर्घटना में घायल युवक को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण मरीज को उसके परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद लिए निजी अस्पताल ले जा रहे थे। निजी एंबुलेंस (Private Ambulance) के माध्यम से मरीज को निजी अस्पताल (Private hospital) ले जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी इसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल अधीक्षक को लगी तो उन्होंने इस मामले का संज्ञान में लिया तो पता चला कि मरीज का उपचार नहीं समय पर नहीं मिल पाने के कारण निजी अस्पताल ले जा रहे हैं। अस्पताल अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद पुन: मरीज को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।


कोरबा जिले के पसान निवासी १८ वर्षीय जिन्द लाल पिता गौरीशंकर कुछ दिन पूर्व अपने नाना के घर कोरिया जिले के चिरमी गया था। यहां वह सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। परिजन ने उसे इलाज के लिए शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराया गया था। यहां चिकित्सकों ने मरीज का सीटी स्कैन कराया, रिपोर्ट में जबड़े की हड्डी टूटना पाया गया। इसके बाद मरीज को सर्जरी वार्ड में भर्ती करा दिया गया।

इसके बाद न तो मरीज को डॉक्टर देखने गए और न ही उसका उपचार शुरू कराया गया। संतोषजनक उपचार न मिल पाने के कारण परिजन ने मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की सोची। परिजन निजी एंबुलेंस के माध्यम से मरीज को शहर के निजी अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे। मरीज की वार्ड से छुट्टी करा कर निजी एंबुलेंस से निजी अस्पताल ले जाने लगे।

कुछ पत्रकारों ने मरीज के परिजन से पूछा तो उन्होंने बताया कि यहां इलाज नहीं हो पा रहा है। ऑपरेशन के लिए कोई डॉक्टर तैयार नहीं हैं। इससे मरीज की जान बचाने के लिए निजी अस्पताल ले जा रहे हैं। पत्रकारों ने इसकी जानकारी एमएस डॉ. लखन सिंह को मोबाइल के माध्यम से दी तो उन्होंने तत्काल स्टाफ भेज कर मरीज को पुन: वार्ड में भर्ती कराया और परिजन को पूरी उपचार किए जाने का भरोसा दिलवाया।


निजी अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर देते हैं सेवा
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगभग जीवन रक्षक हर उपकरण उपलब्ध हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी कमी नहीं है। इसके बावजूद भी मरीज को समय पर उपचार नहीं मिल पाना यह दुखद है। इस सवाल पर एमएस डॉ. लखन सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ही डॉक्टर शहर के पूरे निजी अस्पताल में सेवा दे रहे हैं।

यही डॉक्टर निजी अस्पताल में पूरी ईमानदारी से मरीज का उपचार करते हैं, लेकिन यहां मरीजों के उपचार नहीं कर पाते हैं। यह केवल मरीजों को परेशान करने की साजिश रहती है ताकि परेशान होकर परिजन मरीज को निजी अस्पताल ले जा सकें। इस कार्य में अस्पताल के कर्मचारियों की भी मिलीभगत रहती है।


सेटिंग का चल रहा खेल
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधिकांश डॉक्टर शहर के निजी अस्पताल में सेवा देते हैं। यहां ये दो घंटे भी ईमान्दारी से सेवा देना नहीं चाहते हैं। इसकी आड़ में डॉक्टर भी मरीज को अपने निजी अस्पताल में ले जाकर इलाज करते हैं। मरीजों को तरह-तरह की बात समझा कर उन्हें निजी अस्पताल ले जाने को मजबूर करते हैं। इस कार्य के लिए शहर के निजी अस्पताल पूरी तरह सक्रिय हंै।


गंभीर स्थिति में मरीज को रायपुर किया जाता है रेफर
किसी मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर रहने पर उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर रेफर किया जाता है। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज से निजी अस्पताल रेफर करना शर्मनाक है।

इसलिए वार्ड के स्टाफ नर्स द्वारा मरीज के परिजन से लिखवाते हैं कि अपनी मर्जी से मरीज को लेकर जा रहा हैं, ताकि स्टाफ नर्स व डॉक्टरों पर कोई सवाल न उठ सके। इसके बाद मरीज के परिजन के पीछे बिचौलिए लग जाते हैं और उन्हें निजी अस्पताल ले जाते हैं।

Published on:
13 Feb 2022 09:54 pm
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