No admission case: सरगुजिहा बोली में बात करने पर निजी स्कूल स्वरंग किड्स एकेडमी द्वारा नर्सरी क्लास में बच्चे को एडमिशन नहीं देने का मामला
अंबिकापुर। सरगुजिहा बोली बोलने पर शहर के एक निजी स्कूल ने नर्सरी कक्षा में बच्चे को एडमिशन नहीं दिया। बच्चे के पिता के इस आरोप के बाद मामले (No admission case) में बवाल मचा हुआ है। लोगों द्वारा स्कूल की मान्यता रद्द करने की बात कही जा रही है। इधर कलेक्टर ने डीईओ को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इस पर डीईओ ने स्कूल के प्राचार्य व प्रबंधक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। डीईओ ने लिखा है कि सरगुजिहा बोली बोलने पर बच्चे को एडमिशन आपने नहीं दिया, क्यों न आपका स्कूल स्थायी रूप से बंद कर दिया जाए। उन्होंने स्कूल की मान्यता दस्तावेजों के साथ स्कूल प्रबंधन को कार्यालय में तलब किया है।
बता दें कि शहर के चोपड़ापारा निवासी राजकुमार यादव अपने साढ़े 3 साल के बेटे का नर्सरी क्लास में एडमिशन कराने चोपड़ापारा में ही स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी (No admission case) पहुंचा था। यहां प्रिंसिपल ने यह कहकर उसका एडमिशन नहीं लिया कि बच्चा सिर्फ सरगुजिहा बोली बोलता है। हमारे टीचर उसकी भाषा नहीं समझ पाते हैं।
राजकुमार यादव का कहना था कि स्कूल प्रबंधन ने सप्ताह भर डेमो क्लास लेने के बाद भी बच्चे को एडमिशन नहीं दिया। प्रिंसिपल ने उससे कहा कि आपका बच्चा सरगुजिहा भाषा में बात करता है और जो बड़े घरों के बच्चे आते हैं वे हिंदी में बात करते है। ऐसे में आपके बच्चे की भाषा वे सीख जाएंगे। हम आपके बच्चे को एडमिशन नहीं (No admission case) दे पाएंगे।
उसका कहना है कि यह गलत है, जो सरगुजा का बच्चा है वह सरगुजिहा भाषा में ही बात करेगा। मैंने सोचा कि मेरा भी बच्चा अच्छे स्कूल में पढक़र उसको अच्छी शिक्षा मिले। बड़े घरों के बच्चों के साथ रहकर वह भी हिंदी सीख जाएगा।
पीडि़त पिता का आरोप सामने आने के बाद एनएसयूआई जिलाध्यक्ष ने मामले की शिकायत कलेक्टर ने की। कलेक्टर ने मामले में जांच के आदेश दिए थे।
इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए डीईओ ने स्कूल को नोटिस (No admission case) जारी किया है। नोटिस में लिखा है कि आपका उक्त कृत्य नवीन शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के सर्वथा विपरीत है। अत: क्यों न आपकी संस्था स्थायी रूप से बंद कर दी जाए।