अंबिकापुर

Nursing Home Act: अंबिकापुर में नर्सिंग होम एक्ट की उड़ रहीं धज्जियां, गली-मोहल्लों में अव्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहे निजी अस्पताल

Nursing Home Act: कई के पास लाइसेंस भी नहीं, डॉक्टर और स्टाफ की भी कमी, जिम्मेदारों की चुप्पी के कारण फल-फूल रहा अस्पताल का मकडज़ाल
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Nursing Home Act
Hospital (Demo pic)

अंबिकापुर. शहर सहित सरगुजा जिले में निजी अस्पताल, क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन अधिकांश संस्थान नर्सिंग होम एक्ट (Nursing Home Act) के नियमों के विपरीत संचालित हो रहे हैं। कई क्लिनिक और पैथोलैब ऐसे हैं जिनके पास वैध लाइसेंस तक नहीं है, फिर भी वहां मरीजों का इलाज और जांच की जा रही है।

जिले में 43 निजी अस्पताल, 116 क्लिनिक और 56 पैथोलैब संचालित हैं। इनमें से अधिकांश शहर के गली-मोहल्लों में हैं, जहां बुनियादी मानकों (Nursing Home Act) का भी पालन नहीं हो रहा है। नियमों के अनुसार अस्पतालों के लिए पर्याप्त खुला क्षेत्र और पार्किंग की व्यवस्था अनिवार्य होती है, ताकि एंबुलेंस का आवागमन सुचारु रहे। लेकिन शहर के अधिकांश अस्पताल संकरी जगहों में संचालित हो रहे हैं। केवल 4-5 अस्पताल ही ऐसे हैं जहां न्यूनतम मानकों का पालन होता दिख रहा है।

मैन पावर का संकट

निजी अस्पतालों में डॉक्टर और स्टाफ नर्स की भारी कमी है। मानक के अनुसार 20 बेड पर एक डॉक्टर होना जरूरी है। वहीं 50 बेड के अस्पताल में 3-4 डॉक्टर और 15-20 स्टाफ नर्स (Nursing Home Act) की आवश्यकता होती है। इसके अलावा आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाओं के लिए अलग विशेषज्ञ स्टाफ जरूरी होता है, जो अधिकांश संस्थानों में उपलब्ध नहीं है।

Nursing Home Act: कई लैब में पैथोलॉजिस्ट नहीं

शहर में लगभग बड़े व छोटे मिलाकर कुल 56 से ज्यादा पैथोलैब संचालित हैं। कई ऐसे पैथोलैब हैं, जहां पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर नहीं होते हैं। केवल उनके नाम का यूज (Nursing homes Act) किया जाता है। इसके बदले लैब से ऐसे डॉक्टरों को कमिशन पहुंचाया जाता है। जबकि नियम के अनुसार पैथोलॉजिस्ट के निगरानी में मरीजों का रिपोर्ट तैयार करना होता है। लेकिन नियम के विपरित केवल टैक्निशियन ही जांच कर रिपोर्ट तैयार कर मरीजों को थमा देते हैं।

क्लिनिकों में भी नियमों की अनदेखी

क्लिनिक के लिए न्यूनतम 200 वर्ग फीट क्षेत्र निर्धारित है, साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर, एम्बु बैग और आपातकालीन दवाइयों की व्यवस्था होना अनिवार्य है। लेकिन अधिकांश क्लिनिक (Nursing Home Act) छोटे कमरों में संचालित हो रहे हैं, जहां इमरजेंसी सुविधा का अभाव है। नियमों के अनुसार मरीज की हालत बिगडऩे पर उसे तुरंत सुविधायुक्त अस्पताल में रेफर करना संचालक की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इसमें भी लापरवाही सामने आ रही है।

प्राइवेट अस्पतालों में सरकारी डॉक्टर

शहर के अधिकांश प्राइवेट अस्पतालों में सरकारी डॉक्टर (Nursing Home Act) सेवाएं दे रहे हैं। यह भी नियम के विरूद्ध है। नियम व हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार सरकारी डॉक्टर केवल स्वयं के क्लिनिक में 3 से 4 घंटा निजी प्रैक्टिस कर सकते हैं। इसके बावजूद सारे नियमों को अनदेखी कर सरकारी सेवाएं तो कम निजी अस्पतालों में संवाएं ज्यादा दे रहे हैं। बकायदा निजी अस्पतालों में सरकारी विशेषज्ञों का बोर्ड भी लगे रहते हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है।

अधिकांश अस्पताल नियम के विपरीत संचालित

जिला स्वास्थ्य परिवार अधिकारी व नोडल अधिकारी सरगुजा डॉ. पीके सिन्हा का कहना है कि नियम के अनुसार हर 3 से 4 महीने में निजी अस्पताल, क्लिनिक व पैथोलैब (Nursing Home Act) की जांच की जाती है। कमियां पाए जाने पर व्यवस्था को सुधारने के निर्देश भी दिए जाते हैं। अधिकांश अस्पताल नियम के विपरीत संचालित हो रहे हैं। ऐसे संस्थानों को नियम के अनुरूप संचालित करने के निर्देश दिए जाते हैं।

Updated on:
14 Apr 2026 02:53 pm
Published on:
14 Apr 2026 02:53 pm