अंबिकापुर

Pankaj Bek Custodial Death Case: पंकज बेक कस्टोडियल डेथ केस की 7 साल बाद फिर होगी जांच, कोर्ट ने जारी किया आदेश, CBI को भी सौंपने की कही बात

Pankaj Bek Custodial Death: अंबिकापुर न्यायालय के सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ने पंकज बेक मामले की फिर से जांच के दिए आदेश, विवेचना में कमी या जांच में बाधा आने पर आईजी को केस सीबीआई को सौंपने कहा
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Pankaj Bek Custodial Death Case
Pankar Bek Custodial death case, पंकज बेक जिसकी पुलिस हिरासत में हुई थी मौत (Photo- patrika)

अंबिकापुर। वर्ष 2019 में अंबिकापुर के बहुचर्चित पंकज बेक कस्टोडियल डेथ मामले (Pankaj Bek Death Case) में करीब 7 साल बाद अब नया मोड़ सामने आया है। अंबिकापुर न्यायालय के सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले की पुन: जांच के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक के डायरेक्ट सुपरविजन में की जाए। यदि निष्पक्ष विवेचना संभव नहीं हो या जांच में कोई बाधा आए तो मामले की संपूर्ण विवेचना सीबीआई को सौंपने की कार्रवाई की जाए। साथ ही आदेश की प्रतिलिपि आईजी सरगुजा को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

21 जुलाई 2019 को अंबिकापुर कोतवाली पुलिस की हिरासत में रहे सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सलका-अधिना निवासी पंकज बेक (Pankar Bek suspected death case) पिता अमीर साय 21 वर्ष की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उसे चोरी के एक मामले में हिरासत में लिया गया था और पूछताछ के लिए पुलिस कंट्रोल रूम में रखा गया था।

उसकी लाश एक निजी अस्पताल परिसर में फांसी पर लटकी मिली थी। पुलिस का दावा था कि पंकज हिरासत से भाग निकला था और बाद में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। न्यायिक जांच रिपोर्ट में भी मौत का कारण एंटी मॉर्टम हैंगिंग बताया गया था। हालांकि मृतक के परिजनों ने शुरु से ही पुलिस पर मारपीट, प्रताडऩा और हत्या का आरोप लगाया।

मामले (Custodial death case) ने तूल पकड़ा तो तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी के अलावा एसआई प्रियेश जॉन, मनीष यादव, आरक्षक दीनदयाल सिंह व लक्ष्मण राम के खिलाफ अपराध दर्ज कर सभी को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद मामले में विभागीय जांच, आपराधिक विवेचना और अग्रिम जमानत सहित कई कानूनी प्रक्रियाएं चली थीं।

न्यायालय के आदेश से फिर तेज होगी जांच

करीब 7 वर्ष बाद आए इस आदेश से मामले की जांच एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अदालत ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए पुलिस अधीक्षक की निगरानी में पुन: विवेचना कराने के निर्देश दिए हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की निष्पक्षता पर प्रश्न उठता है या विवेचना प्रभावित होती है, तो प्रकरण को सीबीआई को सौंपने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

Pankaj Bek death in custody: परिजनों को न्याय की उम्मीद

अधिवक्ता राजर्वधन सिंह ने कहा कि अंबिकापुर कोतवाली पुलिस की हिरासत में रहे पंकज बेक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि पंकज ने हिरासत से भागकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। न्यायिक जांच रिपोर्ट में भी मौत का कारण एंटी मॉर्टम हैंगिंग (Anti mortam hanging) बताया गया था।

हालांकि, मृतक के परिजनों ने शुरू से ही पुलिस पर मारपीट, प्रताडऩा और हत्या का आरोप लगाया था। अदालत के इस आदेश के बाद मृतक के परिजनों को मामले में नई उम्मीद जगी है। दूसरी ओर पुलिस विभाग की भूमिका और पूर्व में हुई विवेचना भी एक बार फिर जांच के दायरे में आ सकती है।

Updated on:
30 Jun 2026 07:24 pm
Published on:
30 Jun 2026 07:23 pm
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