अंबिकापुर

स्कूल बसों की जांच के नाम पर खानापूर्ति, फिटनेस परीक्षण में लाई गईं अधिकांश नई बसें

School buses fitness test: एसपी के निर्देश पर यातायात पुलिस द्वारा स्कूल बसों का किया गया भौतिक सत्यापन, फिटनेस में सभी बसें पास, 58 बसों में से 10-12 ड्राइवरों में ही पाया गया नेत्र दोष
2 min read
स्कूल बसों की जांच के नाम पर खानापूर्ति, फिटनेस परीक्षण में लाई गईं अधिकांश नई बसें
School buses fitness test

अंबिकापुर. School buses fitness test: 1 अपै्रल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाएगा। स्कूल खुलने से एक दिन पूर्व सरगुजा पुलिस की नींद खुली और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों का भौतिक परीक्षण किया गया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए।


एसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर यातायात पुलिस द्वारा 31 मार्च को सकालो नर्मदापुर स्थित अम्बिका ऑटो फिटनेस सेंटर में शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 18 निजी स्कूलों के 58 बसों का भौतिक परीक्षण किया गया। इसमें सभी फिट पाए गए।

इसके अलावा 61 बस चालकों एवं हेल्परों का भी नेत्र एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। इसमें 10-12 लोगों मेें नेत्र दोष पाया गया। इन्हें चिकित्सकों ने चश्मा लगाने की समझाइश दी है।

इसके अलावा इन्हें समय-समय पर नेत्र एवं स्वास्थ्य परीक्षण कराने हेतु हिदायत दी गई। साथ ही खास तौर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करने हेतु हिदायत दी गई है।


स्कूल संचालकों द्वारा की गई खानापूर्ति
जानकारी के अनुसार जिले में कई निजी स्कूल संचालित हैं। लेकिन केवल 18 स्कूल के प्रबंधकों द्वारा मात्र ५८ बसों को फिटनेस चेकिंग के लिए लाया गया था। जबकि स्कूलों में कई बसें संचालित होती हैं।

स्कूल प्रबंधन पुरानी बसों को फिटनेस जांच के लिए नहीं लाए थे। केवल नई बसों की फिटनेस जांच कराकर खानापूर्ति कर दी गई। जबकि सडक़ों पर कई कंडम बसें चलती दिखाई देती हैं।


सीट से ज्यादा बैठाए जाते हैं बच्चे
स्कूल बसों के संचालन को लेकर कई आवश्यक दिशा निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए हैं। लेकिन स्कूल प्रबंधकों द्वारा कोर्ट के निर्देशों को दरकिनार कर धड़ल्ले से बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को लाने-ले जाने का काम किया जाता है। अधिकतर स्कूल बसों में सीट से ज्यादा बच्चों को बैठाया जाता है।


सुप्रीम कोर्ट कोर्ट के ये हंै निर्देश
बसों के आगे-पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए।
स्कूली बसों में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की व्यवस्था करें।
प्रत्येक बसों में आग बुझाने के उपकरण होने चाहिए।
अगर किसी एजेंसी से बस अनुबंध पर ली गई है, तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए।


बसों में सीट क्षमता से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
प्र्रत्येक स्कूल बस में हॉरिजेंटल ग्रिल लगे हों।
स्कूल बस पीले रंग का हो, जिसके बीच में नीले रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम और फोन नम्बर लिखा होना चाहिए।
बसों के दरवाजे को अंदर से बंद करने की व्यवस्था होनी चाहिए।


बस में सीटें के नीचे बैग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।
बसों में टीचर जरूर होने चाहिए, जो बच्चों पर नजर रखें।
प्रत्येक बस चालक को कम से कम 5 साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव होनी चाहिए।

Published on:
31 Mar 2024 08:53 pm
Also Read
View All
IPS Rahul Bansal: अंबिकापुर के CSP राहुल बंसल पर हवाला के जरिए 1 करोड़ की घूस लेने का आरोप, दिल्ली की विशेष अदालत ने जारी किया नोटिस

Ambikapur Land Fraud: 63 साल पहले मर चुके व्यक्ति को जिंदा बताकर करा दी 30 लाख की जमीन की रजिस्ट्री, 2 महिला सहित 3 गिरफ्तार

Ambikapur Road Accident: अंबिकापुर-बिलासपुर एनएच पर कार-बस में जबरदस्त भिड़ंत, 1 महिला की मौत, 7 घायल

Ambikapur News: पेट्रोल पंप में चिपकी मिली बेगुसराय के युवक की लाश, पिता बोला- ठेकेदार ने कराई हत्या, 20 लाख लेकर आया था घर से

Surguja News: महिला के शरीर पर लगाया गोबर का लेप, फिर एंबुलेंस से लेकर पहुंचे अस्पताल, डॉक्टर बोले- इसकी तो मौत हो गई है