सूर्यषष्ठी पर्व पर छठव्रतियों द्वारा पहले डूबते और फिर उगते भगवान सूर्य को दिया जाता है अघ्र्य, मिलता है पुण्य लाभ
अंबिकापुर. भगवान सूर्य को अघ्र्य देना काफी फलदायी होता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है और लोग स्वस्थ रहते हैं। सूर्यषष्ठी पर्व पर डूबते व उगते सूर्य को अघ्र्य दिया जाता है। इन दिनों छठ पर्व की धूम मची हुई है।
नदी-तालाबों व छठघाटों पर छठव्रतियों व उनके परिजनों की भीड़ जुट रही है। चार दिवसीय इस पर्व का शुभारंभ सोमवार को नहाय-खाय के साथ हुआ। मंगलवार को छठव्रती डूबते सूर्य तथा बुधवार को उगते सूर्य को अघ्र्य देकर पारण करेंगे।
ऐसी मान्यता है कि भगवान सूर्य को अघ्र्य देने से परिवार में सुख व शांति आती है। साथ ही यह निरोगी काया एवं सभी मनोरथ को पूर्ण करने वाला होता है।
भगवान सूर्य को अघ्र्य देने के दौरान छठव्रती पीतल व तांबे के पात्रों का प्रयोग करें। इसके अलावा किसी प्रकार के बर्तनों का प्रयोग करना वर्जित माना गया है। पीतल के पात्रों से दूध का अघ्र्य देना सही है, वहीं तांबे के पात्र में जल से अघ्र्य देना चाहिए।
वहीं छठ व्रतियों द्वारा बांस के बने सूप व दौरा का भी उपयोग अघ्र्य देने के लिए किया जाता है। अघ्र्य देने से भगवान सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और मनवांछित फल प्रदान करते हैं।