अंबिकापुर

Ambikapur News: ऐसी भी बहनें जो बनीं परिवार की ढाल, सुनैना, सुमित्रा और किरण भाई से लेकर पूरे परिवार की भी उठा रहीं जिम्मेदारी

Ambikapur Rakshabandhan Story: भाई को राखी बांधकर बहनें मांगती है अपनी सुरक्षा और साथ का वचन, लेकिन ऐसी बहनें भी हैं जो भाई-बहन से लेकर परिवार की उठा रहीं पूरी जिम्मेदारी, रक्षाबंधन पर 3 बहनों की कहानी आई सामने
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Sunaina, Sumitra and Kiran Story
Ambikapur news, सुनैना, सुमित्रा और किरण (Photo- Patrika)

अंबिकापुर। रक्षाबंधन पर आमतौर पर बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर (Rakshabandhan) उनसे अपनी सुरक्षा और साथ का वचन लेती हैं। लेकिन बदलते सामाजिक दौर में इस रिश्ते की तस्वीर भी बदल रही है। अब बहनें सिर्फ सुरक्षा की उम्मीद करने वाली नहीं, बल्कि परिवार और भाई की जिम्मेदारी उठाने वाली मजबूत कड़ी बन रही हैं। कोई भाई को पढ़ाकर नौकरी तक पहुंचा रही है तो कोई शादी के बाद भी मायके की जिम्मेदारी निभा रही है। वहीं कुछ बहनें अपने छोटे भाई-बहन की पढ़ाई और माता-पिता की देखभाल का खर्च भी उठा रही हैं। इस रक्षाबंधन पर ऐसी ही 3 बहनों सुनैना, किरण और सुमित्रा की कहानी सामने आई है, जिनके लिए राखी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और संकल्प का प्रतीक है।

एमसीबी जिले के जनकपुर निवासी सुनैना सिंह (Sunaina Singh) अंबिकापुर के एमएसएसव्हीपी बालिका गृह सेंटर में कार्यरत हैं। वर्ष 2010 में जब वह यहां आई थीं, तब उन्होंने केवल 10वीं तक पढ़ाई की थी। बालिका गृह में रहते हुए नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी और एमए तक की शिक्षा पूरी की। इसके साथ ही परिवार की जिम्मेदारी भी संभालती रहीं। सुनैना ने भाई को पढ़ाया और नगर सैनिक की नौकरी लगवाई।

Ambikapur news, सुनैना सिंह (Photo- Patrika)

एक बहन को पढ़ाकर उसकी शादी कराई। परिवार की जिम्मेदारियां निभाते-निभाते उन्होंने खुद शादी नहीं की। भाई की शादी के बाद उसके 2 बच्चों की जिम्मेदारी भी अब सुनैना उठा रही हैं और भतीजे-भतीजी की पढ़ाई का खर्च भी वहन कर रही हैं। हालांकि, भाई की नशे की आदत उन्हें सबसे ज्यादा परेशान करती है। शराब के कारण भाई की नौकरी भी छूट गई।

सुनैना ने प्रयास कर उसे दोबारा नौकरी दिलाई, लेकिन आदत नहीं बदली। इस रक्षाबंधन पर वह भाई से किसी महंगे उपहार की जगह नशामुक्ति का वचन मांग रही हैं। उनका कहना है कि भाई राखी के रिश्ते और परिवार की जिम्मेदारी को समझे और नशे से दूर रहे।

Ambikapur Special story: भाई-बहन की पढ़ाई का खर्च उठा रही सुमित्रा

सूरजपुर जिले के धर्मपुर निवासी सुमित्रा सिंह एमएसएसव्हीपी (MSSVP) में बाल कल्याण अधिकारी हैं। उन्होंने खुद मेहनत कर एमए और एमएसडब्ल्यू तक की पढ़ाई की। इसके साथ ही अपने से छोटे भाई और बहन की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठा रही हैं। सुमित्रा का भाई बीए पार्ट-1 में पढ़ रहा है, जबकि बहन एमए की पढ़ाई पूरी कर शासकीय नौकरी की तैयारी कर रही है। सुमित्रा भाई की पढ़ाई, बहन के हॉस्टल का खर्च, कॉपी-किताब समेत अन्य जरूरतों का खर्च स्वयं उठा रही हैं।

Ambikapur news, भाई के साथ सुमित्रा सिंह (Photo- Patrika)

साथ ही समय-समय पर माता-पिता की जरूरतों का भी ध्यान रखती हैं। सुमित्रा के लिए राखी का अर्थ सिर्फ भाई की कलाई पर धागा बांधना नहीं, बल्कि उसके भविष्य को मजबूत करने का संकल्प है। इन तीनों बहनों की कहानियां बताती हैं कि बदलते समाज में रक्षा का रिश्ता अब एकतरफा नहीं रहा। भाई बहन की रक्षा का वचन देता है तो बहन भी परिवार की ढाल बनकर उसके भविष्य और सम्मान की रक्षा कर रही है।

शादी के बाद भी मायके की जिम्मेदारी बढ़ी

मैनपाट (Mainpat) के जंगलपारा निवासी किरण मिंज बालिका गृह में हाउसमदर के पद पर कार्यरत हैं। परिवार में मां, भाई और तीन बहनें हैं। वर्ष 2016 से किरण परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने एमए तक पढ़ाई की और अपनी छोटी बहन को भी एमए तक पढ़ाया। किरण की वर्ष 2025 में शादी हुई। शादी के कुछ ही समय बाद पिता का निधन हो गया। इसके बाद मायके की जिम्मेदारी और बढ़ गई।

Ambikapur news, भाई-बहन के साथ किरण मिंज (Photo- Patrika)

छोटा भाई कृषि कार्य करता है। किरण का कहना है कि शादी के बाद भी मायके और भाई-बहनों के प्रति जिम्मेदारी कम नहीं हुई है। रक्षाबंधन पर उनका संदेश है कि मेरा छोटा भाई है, उसकी सुरक्षा और जरूरत के समय मदद करना मेरी जिम्मेदारी है। जितना संभव होगा, मैं उसका साथ देती रहूंगी।

Updated on:
27 Aug 2026 07:33 pm
Published on:
27 Aug 2026 07:33 pm
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