अंबिकापुर

ठेकेदारों पर मेहरबान हैं निगम के ऑफिसर, चहेतों को मालामाल करने नियम की उड़ा रहे धज्जियां

शहर की सड़कों के डामरीकरण में प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स का होना था इस्तेमाल, निगम के निर्माण कार्यों में नियम-मापदंड का कोई मतलब नही
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Ambikapur road
Corporation road

अंबिकापुर. चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने शासन द्वारा निर्धारित किए गए नियमों को दरकिनार कर दिया और शहर के कई वार्डों में डामरीकरण करने का काम भी दे दिया। जिन शर्तों का पालन कराने की जिम्मेदारी अधिकारियों पर थी, वह संसाधन ठेकेदार के पास उपलब्ध नहीं है।

तकनीकी स्तर पर जिस निविदा को निरस्त किया जाना था। इसके बावजूद इसकी स्वीकृति अधिकारियों द्वारा प्रदान कर दी गई। सड़क निर्माण के दौरान डामर में बेस्ट प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स को मिक्स कर डामरीकरण करना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब ठेकेदार द्वारा किए गए कार्यों का भुगतान भी करने की तैयारी की जा रही है।


नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों में डामरीकरण कार्य हेतु 9.60 करोड़ रुपए की निविदा जारी की गई थी। शहर के दो बड़े ठेकेदारों को नियम व शर्तों के अधीन निविदा भी दी गई, लेकिन शासन द्वारा सड़क निर्माण के लिए जो नियम व शर्त निर्धारित किए गए थे, उसे ही दरकिनार कर दिया गया।

दोनों ठेकेदारों ने आनन-फानन में कई वार्डों के डामरीकरण का काम भी शुरू कर दिया, जबकि सड़क निर्माण के दौरान डामर में बेस्ट प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स को मिक्स कर डामरीकरण करना था लेकिन दोनों ठेकेदारों ने डामरीकरण किए जाने से पूर्व डामर में प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स मिक्स ही नहीं किया और अधिकांश वार्ड में डामरीकरण का काम पूर्ण कर लिया।


प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स के लिए नहीं दिया आवेदन
डामरीकरण का काम कर रहे ठेकेदारों ने कभी नगर निगम में बेस्ट प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स प्राप्त करने हेतु आवेदन नहीं लगाया। जबकि निविदा की शर्त ३५ के अनुसार प्लास्टिक रोड निर्माण में प्रयुक्त होने वाले बेस्ट प्लास्टिक ग्रेन्युल्स नगर निगम को ही देना था। इसके लिए ठेकेदार को निगम में आवेदन किया जानाा चाहिए था।


निगम के अधिकारी नहीं करते हैं मॉनिटरिंग
नगर निगम के अधिकारी निविदा में काम शुरू कराने के बाद कभी भी कार्यस्थल पर जाकर मॉनिटरिंग नहीं करते हैं। इसकी वजह से सभी ठेकेदार निर्धारित शर्तों के विपरित जाकर ज्यादा लाभ के चक्कर में गुणवत्ताविहीन काम कर कर भुगतान प्राप्त कर लेते हैं। निगम के तकनीकी अधिकारी कार्यस्थल का निरीक्षण करते ही नहीं हैं। सिर्फ ये जब काम समाप्त हो जाता है तब बिल बनाने के लिए कार्यस्थल पर पहुंचते हैं।


अब भुगतान में भी हो सकती है अड़चन
प्लास्टिक मिक्स सड़क नहीं बनाए जाने से नगर निगम के सामने सबसे बड़ी समस्या भुगतान में आएगी। नियमानुसार ५० प्रतिशत से अधिक सड़क प्लास्टिक मिक्स बनाई जानी थी और अगर ठेकेदार ने नहीं मिलाया है तो उसे भुगतान किस आधार पर निगम के अधिकारी करेंगे यह सबसे बड़ा सवाल है।


सामान्य सभा में उठा चुके हैं सवाल
बेस्ट प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स मिक्स कर सड़क निर्माण किया जाना चाहिए। इसे लेकर पार्षद मधुसूदन शुक्ल सामान्य सभा में भी सवाल खड़े कर चुके हैं। इसपर सभापति शफी अहमद ने एक कमेटी बनाकर जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं। इसे लेकर अलग से आयुक्त को भी पार्षद मधुसूदन शुक्ला शिकायत कर चुके हैं।
पूर्व में भी हो चुका है विवाद
इसी निविदा को लेकर पूर्व में विवाद होने पर निगम ने इसे निरस्त कर दिया था। इसके बाद नगर निगम द्वारा उन्हीं ठेकेदारों को काम दे दिया गया जिन्होंने काम शुरू होने से पूर्व निविदा पर सवाल भी खड़े किए थे।


नहीं करना था अतिरिक्त भुगतान
ठेकेदार को सड़क निर्माण के लिए जो प्लास्टिक मिक्स करना था, उसका अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाना था। इसके बावजूद निगम के अधिकारी प्लास्टिक डामर मिक्स सड़क बनवाने में ज्यादा रूची नहीं दिखाई।


शिकायत आएगी तो करेंगे कार्रवाई
नियमानुसार डामरीकरण कार्य में बेस्ट प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स मिक्स किया जाना था। इस संबंध में अगर कोई शिकायत आती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सूर्यकिरण तिवारी, निगम आयुक्त


नहीं है एसओआर में
नियमानुसार बेस्ट प्लास्टिक ग्रेन्युअल्स मिक्स किया जाना था, लेकिन यह एसओआर में नहीं है। इसे देखकर ही कुछ निर्णय लिया जा सकता है।
सुनील सिंह, ईई नगर निगम

Published on:
09 Jul 2018 02:29 pm
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