मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के ऑफिस में लगाने के लिए मंगवाई गई थी राष्ट्रपति की फोटो, किचन में राशन सामान के साथ रखा गया
अंबिकापुर. राष्ट्रपति का पद राष्ट्रीय गौरव का होता है। इनकी तस्वीरें ससम्मान लगाईं जानी चाहिए। यदि फोटो फे्रम टूट भी गईं हो तो उसे ससम्मान विसर्जित करना होता है। यदि ऐसा नहीं है तो यह राष्ट्र के गौरव का अपमान होता है। ऐसा ही मामला अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देखने को मिला।
यहां देश के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तस्वीर बुधवार को किचन में कचरे के ढेर में पड़ी मिलीं। कानून विशेषज्ञों के अनुसार यह राष्ट्रीय गौरव का अपमान है और इस तरह के कृत्य करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
देश के सर्वोच्च पद को राष्ट्रपति सुशोभित करते हैं। वे देश के प्रथम नागरिक होने के साथ ही संसद के कार्यकारी प्रमुख (भारत का सर्वोच्च विधायी निकाय, जिसमें दोनों सदन शामिल हैं), भारत की न्यायपालिका के प्रमुख, भारतीय सशस्त्र बलों का प्रमुख माने जाने के साथ उन्हें राष्ट्रीय गौरव माना जाता है। देश के सभी कार्यालयों में उनकी फोटो सम्मान के साथ लगाया जाता है।
लेकिन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के किचन में देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तस्वीर को कचरे के ढेर में रखा गया है। किचन प्रभारी राष्ट्रपति के फोटो को कितना सम्मान देते हैं यह कचरे में ढेर में रखे फोटो को देखने के बाद पता चल जाता है।
इस संबंध में जब किचन प्रभारी अमरनाथ कश्यप से पूछा गया तो उन्होंनेे झल्लाते हुए कहा कि फोटो फे्रम टूट गया है। अब बताओ कि मैं तस्वीर को कहां रखूं।
गौरव का है अपमान
फोटो फ्रेम अगर टूट भी गया है, और वह राष्ट्रीय गौरव से संबंधित है तो संविधान के प्रावधानों के अनुसार उसे बड़े ही सम्मान के साथ पानी में विसर्जित किया जाना चाहिए। लेकिन राष्ट्रपति की तस्वीर कचरे के ढेर में उस संस्थान में मिली जहां संविधान की शपथ ली जाती है।
डॉक्टर के कक्ष में लगाने के लिए मंगाई गई थी तस्वीर
राष्ट्रपति की तस्वीर डॉ. व्हीके श्रीवास्तव के कक्ष में लगाने के लिए मंगायी गई थी। अगर फोटो किचन में पड़ा हुआ है तो इसकी जानकारी मुझे नहीं है। पता लगवाता हूं।
डॉ. एके जायसवाल, अस्पताल अधीक्षक
राष्ट्र के गौरव का है अपमान
राष्ट्रपति का पद राष्ट्रीय गौरव का है। राष्ट्रपति के फोटो का अपमान करना राष्ट्र के गौरव का अपमान करना है। इस संबंध में कार्रवाई की जानी चाहिए।
संजय अम्बष्ट, अधिवक्ता