अंबिकापुर

गृहमंत्री को जहां से मिले थे सबसे अधिक वोट, वहां के लोग इस बार हैं उनसे नाराज, कह दी ये बात

अविभाजित सरगुजा की 8 सीटों में प्रतापपुर विधानसभा ही एक ऐसी थी जिसपर भाजपा ने हासिल की थी जीत

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अंबिकापुर/पोड़ी मोड़. प्रतापपुर विधानसभा का ग्राम मटिगड़ा, ये वही बूथ है, जहां शिवचर्चा के लिए भवन बनाकर देने सहित अन्य कई वादे कर राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा ने सर्वाधिक 715 वोट हासिल किए थे। अविभाजित सरगुजा की 8 सीट में से प्रतापपुर विधानसभा ही इकलौती सीट थी जो भाजपा की झोली में गई थी।

आज ५ साल बीत गए, लेकिन मंत्री के सर्वाधिक वोट वाले बूथ मटिगड़ा में विकास की रफ्तार तेज नहीं हुई। बल्कि मंत्री ने जो वादे किए थे, वे भी पूरे नहीं हुए। इस बार गांव में वादाखिलाफी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और परिस्थितियां थोड़ी विपरीत नजर आ रहीं हैं।

सरपंच सोहर साय का कहना है कि गृहमंत्री के वादे के अनुरुप शिवचर्चा के लिए भवन नहीं बनवाए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। सीसी रोड और चबूतरा तक नहीं बन पाया।

वहीं चर्चा के दौरान ग्रामीण कहते हैं कि पंचायत के तीन-चार पारे में हैंडपंप तक की सुविधा नहीं है, इससे लोगों को पेयजल की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब वादा ही पूरा नहीं हुआ तो इस बार वोट भी सोच-समझकर ही करेंगे।


गांव में समस्याओं का अंबार
गांव में समस्याओं का अंबार है। शिवचर्चा के लिए भवन नहीं बना, अन्य कार्य नहीं हुए। मनरेगा की मजदूरी दो-तीन साल से लंबित है। जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटकर थक गए, लेकिन सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
संग्राम देवांगन, निवासी मटिगड़ा


उपेक्षा का शिकार है ग्राम जगन्नाथपुर
प्रतापपुर विधानसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. प्रेमसाय सिंह भले ही हार गए थे, लेकिन उन्होंने भी अपने चुनावी वादों के दम पर एसईसीएल प्रभावित ग्राम जगन्नाथपुर बूथ से सर्वाधिक 784 वोट हासिल किए थे। लेकिन इस गांव की बदहाली आज तक दूर नहीं हो सकी। शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में इस ग्राम की स्थिति काफी खराब है।


ग्रामीणों को पीएम आवास का लाभ अभी तक नहीं मिल सका है। सीसी रोड नहीं बन पा रहे हैं, बिजली ट्रांसफार्मर नहीं लग पा रहा है। अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी कमी बनी हुई है। चर्चा के दौरान ग्रामीण कहते हैं कि समस्याओं से न तो मंत्री को लेना-देना है और न ही दूसरे दल के किसी नेता को।

ग्रामीण नहीं चाहते हैं कि एसईसीएल की महान तीन माइंस यहां खुले, उनका कहना है कि जब हम जमीन दे देंगे तो हम जाएंगे कहा। वे माइंस का विरोध कर रहे हैं तथा जमीन नहीं देना चाह रहे हैं। उनका आरोप है कि विकास कार्यों में गांव की काफी उपेक्षा की जा रही है। जनपद से ही कार्यों को बाधित किया जा रहा है, हर काम के लिए लड़ाई लडऩी पड़ती है।

गांव की उपेक्षा से लोगों में दोनों दल के जनप्रतिनधियों को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि जो हमारी समस्याओं को गंभीरता से सुनकर निराकरण करेगा, उसे ही इस बार मतदान करेंगे।

गांव में विकास कार्य किए जा रहे बाधित
गांव में विकास कार्य बाधित किए जा रहे हैं। लोग नहीं चाहते कि गांव में माइंस खुले, इसलिए विरोध करते हुए जमीन नहीं देना चाहते। समस्याएं जस की तस बनी हुई है, जनप्रतिनिधि भी कोई सुनवाई नहीं करते। विकास कार्यों के मामले में हमारा गांव प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है।
छोटेलाल, पंच, जगन्नाथपुर

Published on:
16 Sept 2018 04:37 pm
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