Sneke bite: रात में जमीन पर सोने के दौरान सांप ने युवक के कान में डस लिया (Snake bite in ear) था, शोर मचाकर घरवालों को जगाया तो उन्होंने सांप को बना लिया बंधक (Hostage snake), डॉक्टर ने सीएचसी से रेफर किया मेडिकल कॉलेज अस्पताल
अंबिकापुर. Sneke bite: बारिश के सीजन में आए दिन सर्पदंश के मामले सामने आते रहते हैं। अधिकांश घटनाएं ग्रामीण इलाकों में जमीन पर सोने के दौरान घटित होती हैं। ऐसे ही एक मामले में लखनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक युवक को जमीन पर सोने के दौरान शनिवार की रात डंडा करैत सांप ने डस (Snake bite) लिया। इसी खबर जब उसके घरवालों को हुई तो उन्होंने एक डिब्बे में सांप को बंद कर दिया और उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों को सांप दिखाकर कहा कि इसने मुझे डस लिया है। यह देख डॉक्टर भी सकते में आ गए, उन्होंने तत्काल डिब्बा बंद कराया। फिलहाल युवक का इलाज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।
लखनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम करई, कुन्नी निवासी 34 वर्षीय मूलचंद शनिवार की रात खाना खाने के बाद जमीन पर बिस्तर लगाकर सो रहा था। इसी दौरान देर रात उसे कान में कुछ काटने का एहसास हुआ। उसने सोचा कि किसी कीड़े ने काटा होगा तो वह जाग गया। उसने लाइट जलाकर देखा तो पास में जहरीला डंडा करैत सांप लेटा हुआ था।
इसके बार शोर मचाकर उसने घरवालों को जगाया। परिजन वहां पहुंचे और तत्काल सांप को पकडक़र एक डिब्बे में बंद कर दिया। फिर आनन-फानन में मूलचंद को परिजन लखनपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। वे अपने साथ डिब्बे में बंधक बनाए गए सांप (Snake hostege in box) को भी लेकर गए।
यहां डॉक्टर को सांप दिखाकर कहा कि इसने ही मुझे डस लिया है। सांप को देखकर डॉक्टर भी सकते में आ गए। फिर डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के लिए रेफर कर दिया।
जारी है इलाज
लखनपुर अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद परिजन के साथ युवक मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचा। यहां भी उसने डॉक्टरों को करैत सांप दिखाकर कहा कि इसने मुझे कान में डस लिया है। फिलहाल युवक का इलाज जारी है, उसकी हालत अभी खतरे से बाहर बताई जा रही है।
ग्रामीण नहीं हो रहे जागरुक
जमीन पर सोने के दौरान सर्पदंश (Snake bite) के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। इसके बावजूद बारिश के दिनों में भी ग्रामीण इलाके के लोग जमीन पर सोते हैं। जमीन पर सोते समय सांप डसने की जानकारी होने के बावजूद वे जागरुक नहीं हो रहे हैं। ऐसे में सर्पदंश के अधिकांश मामले में लोगों की जान चली जाती है।