बीते माह ही सेना ने इस साल 76,500 लोगों को सेना में शामिल करने का लक्ष्य पूरा न हो पाने की घोषणा की थी, मगर निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में विफल रही है
वाशिंगटन। रूस और चीन का खतरा नहीं अमरीका का सिरदर्द कुछ और ही बनता जा रहा है। यह समस्या खुद उसकी जनता ने खड़ी की है। सेवानिवृत जनरल और एडमिरल द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार करीब एक तिहाई युवा मोटापे के कारण सेना में शामिल नहीं हो सकते हैं। इसके कारण अमरीका को सेना में नियुक्ति की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। बीते माह ही सेना ने इस साल 76,500 लोगों को सेना में शामिल करने का लक्ष्य पूरा न हो पाने की घोषणा की थी। 2005 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि सेना नियुक्ति के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में विफल रही है।अमरीका के पास तकनीक की कमी नहीं है, मगर उसके पास संख्याबल की कमी है। सीरिया में वह कई मोर्चे पर युद्ध लड़ रहा है। इसके साथ वह अफगानिस्तान में आतंकियों को रोकने के लिए अफगान सैनिकों की मदद कर रहा है।
सेना में भर्ती के लिए योग्य युवाओं की कमी
'काउंसिल फॉर ए स्ट्रांग अमरीका' ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मोटापा देश के स्वास्थ्य पर खतरा था। अब यह देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गया है।' रक्षा विभाग का कहना है कि जब तक कम उम्र में ही बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की ओर नहीं बढ़ते है,तब तक सेना में नियुक्ति की समस्या बनी रहेगी। रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा कि सेना में भर्ती होने के लिए योग्य युवाओं की संख्या में कमी बड़ी समस्या है।
स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन को बढ़ावा
मैटिस ने स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहे सेवानिवृत सैन्य अधिकारियों की भी सराहना की। गौरतलब है कि अमरीकी सेना हर साल मोटापे संबंधित बीमारियों के इलाज और इसके कारण रिक्त हुए पदों को भरने के लिए 1.5 अरब डॉलर यानि करीब 11 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है।