Iran-Israel Conflict: ईरान दुनिय़ा के बड़े तेल निर्यातकों में से एक है। अमरीका ईरान पर पहले ही काफी प्रतिबंध लगा चुका है। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमरीका ईरान को कमजोर करने के लिए उसके तेल निर्यात करने पर प्रतिबंध लगा सकता है। अगर ऐसा होता है तो पूरी दुनिया को एक बार फिर महंगे तेल की मार झेलनी पड़ सकती है।
Iran-Israel Conflict: ईरान-इजरायल के बीच युद्ध की संभावना बढ़ती ही जा रही है। इजरायल के ऐलान करने के बाद कि वो ईरान पर जवाबी हमला करेगा, इसके बाद तो अमरीका समेत कई देश सकते में आ गए। अमरीका (USA on Israel) इजरायल को संयम बरतने की सुझाव दे चुका है लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि इजरायल इस बात के लिए मानेगा। अब ऐसा माना जा रहा है कि अमरीका अब ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने के कदम उठा सकता है। जिसमें ईरान पर तेल निर्यात (Oil Export) को लेकर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है लेकिन जानकारों का कहना है कि अमरीका ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
दरअसल विश्लेषकों ने कहा कि इजरायल पर ईरान के हमले (Iran Attack on Israel) से तेल की कीमतें बढ़ने और शीर्ष खरीदार चीन के नाराज होने की चिंताओं की वजह से ही अमरीका ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता। ना ही ऐसी कोेई संभावना नजर आ रही है।
बीते रविवार को आई एक अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अमरीकी सीनेटर स्टीव स्कैलिस ने कहा कि अमरीकी प्रशासन ने ईरान के लिए अपना तेल बेचना आसान बना दिया है जिससे भरपूर राजस्व मिलता है। अब इसका उपयोग आतंकवादी गतिविधि को वित्त पोषित करने के लिए किया जा रहा है। अगर अमरीका ईरान पर प्रतिबंध लगाता है तो पूरी दुनिया मे कच्चे तेल की कीमत बढ़ जाएगी और इससे ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीददार चीन नाराज हो जाएगा।
गौर करें तो वाशिंगटन पहले भी कह चुका है कि उसका प्राथमिक उद्देश्य हमास और इज़राइल के बीच (Israel-Hamas War) गाजा संघर्ष को रोकना है क्योंकि इससे बही ईरान को रोका जा सकता है। कई क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि उन्हें शक है कि बाइडेन (Joe Biden) ईरान के कच्चे तेल के निर्यात को रोकने के लिए मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने के लिए बड़ी कार्रवाई करेंगे, जो इसकी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है।
दूसरी तरफ अमरीकी सीनेटर स्कॉट ने कहा कि भले ही ये बिल पारित हो जाएं, लेकिन ईरानी तेल निर्यात में किसी भी तरीके से कटौती या अंकुश लगाने के लिए बाइडेन सरकार की कोशिशें मुश्किल दिखाई दे रही हैं।