तुर्की के जांचकर्ताओं को शक है कि दूतावास के भीतर ही उनकी हत्या कर शव को वहीं ठिकाने लगा दिया गया
वॉशिंगटन। पिछले एक हफ्ते से भी ज्यादा समय से लापता पत्रकार जमाल खाशोगी के बारे में अब तक कुछ भी नहीं पता चल सका है। सब्र का बांध टूटता जा रहा है और अब खाशोगी को लेकर उनके हितैशियों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। पहले बड़े-बड़े लोगों ने 'दावोस इन डेजर्ट' सेमीनार से वॉकआउट कर सऊदी को चौंकाया और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनपर निशाना साधा है। ट्रंप ने साफ किया है कि दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा और सऊदी अरब अगर इसमें शामिल हुआ तो वह काफी नाराज हो जाएंगे।
कौन है पत्रकार जमाल खाशोगी
सऊदी के जमाल वॉशिंगटन पोस्ट के लिए लिखते हैं। वह अरब के शाही परिवार के आलोचक रहे हैं। वह क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नीतियों के आलोचक रहे हैं। दो अक्टूबर को वह इस्तांबुल में सऊदी दूतावास गए थे और उसके बाद से ही लापता हो गए। वहां वह अपनी शादी के लिए जरूरी कागजात लेने पहुंचे थे। तुर्की के जांचकर्ताओं को शक है कि दूतावास के भीतर ही उनकी हत्या कर शव को वहीं ठिकाने लगा दिया गया। हालांकि,सऊदी अरब ने इन आरोपों को मानने से करार कर दिया है।
दोषियों को सजा मिलेगी
एक साक्षात्कार में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस मामले पर उनकी पूरी नजर है। अगर मामला वह निकला जो बताया जा रहा है तो अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वह सऊदी से बहुत निराश और नाराज होंगे। वह मामले की गहराई तक जाएंगे और दोषी को सजा मिलेगी। हालांकि,ट्रंप ने कहा है कि सऊदी अरब के दोषी पाए जाने पर अमरीका,सऊदी अरब को हथियार बेचना बंद नहीं करेगा।
किसने पीछे खींचे हाथ
बता दें कि 23 अक्टूबर से सऊदी अरब में 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव' होना था। इसे दावोस इन डेजर्ट कहा जा रहा है। खाशोगी का मामला उछलने के बाद कई मीडिया हाउसेज, कंपनियों और जाने-जाने लोगों ने इसमें जाने से इनकार कर दिया है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम, ऊबर के सीईओ दारा खुशरोशाही, वियाकॉम के सीईओ बॉब बकिश इसमें शामिल नहीं होंगे। वहीं मीडिया में इकनॉमिस्ट,एल ए टाइम्स, सीएनएन, न्यूयॉर्क टाइम्स,ब्लूमबर्ग, फाइनैंशल टाइम्स, सीएनबीसी आदि इसका बहिष्कार करेंगे।