कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिवसीय अमेठी दौरे को ख़त्म कर लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
अमेठी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिवसीय अमेठी दौरे को ख़त्म कर लखनऊ के लिए रवाना हो गए। दो दिन के अपने दौरे में वो 2019 के अपनी ज़मीन हमवार करते हुए नजर आए। बुधवार को उन्होंंने जहां मदरसे में खाना खा कर मुस्लिम वोट बैंक पर डोरे डाले वहीं गौरीगंज में गौशाला में रहने वाली गायों के बारे में जानकारी लेकर हिंदू वोट बैंक को साधने की कोशिश किया।
बता दें अमेठी दौरे पर बुधवार को पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सबसे पहले फुरसतगंज में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेसजनों के लिए शक्ति प्रोजैक्ट लांच किया था। इसके बाद वह सीधे जायस के धिंगई गांव रवाना हो गए और वह किसान अब्दुल सत्तार के घर पहुंचे। यहां उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। साथ ही राहुल गांधी ने हर संभव मदद देने का भरोसा दिया था। उसके बाद राहुल गांधी तिलोई विधानसभा के दूनी का पुरवा गांव पहुंचे। यहां गांव में स्थित मदरसा फ़ातिमतुल कुबरा के बाहर बाग में राहुल गांधी ने लंच किया। लोगों ने बताया कि 10 साल पहले भी राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ यहां आए थे। गांव वालों ने बताया कि जहां इस समय मदरसा है, उस समय बाग हुआ करता था दोनों ने यहीं लंच किया था।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केंद्रीय कार्यालय में जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्या सुनी। अपने लोकप्रिय सांसद से मिलने के लिए भारी भीड़ जमा थी। इन दौरान दिव्यांग भी उनके मुलाकात करने के लिए लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे थे। राहुल से मिलने के लिया जगदीशपुर विधानसभा के निहालगढ़ कस्बा का दिव्यांग मोहम्मद अयाज बुधवार कल देर रात से ही इस कार्यालय के बाहर डटा था। मोहम्मद अयाज घर में दरवाजा लगवाने की मांग लेकर आया है।
राहुल ने अमेठी कस्बे के गांधी चौक पर स्थित स्व देवी प्रसाद कसौधन के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की। कुछ दिन पूर्व देवी प्रसाद का निधन हुआ था। राहुल गांधी कांग्रेस नेता राममूर्ति शुक्ल के घर वैवाहिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए। आखिरी दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तर्ज़ पर गौरीगंज के बाबु के पुरवा गांव स्थित गौशाला पहुंचे। वहां उन्होंने गौशाला में रहने वाली गायों के बारे में जानकारी ली। देखरेख करने वाले किसान से बातचीत की और व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद दोपहर दो बजे वह 20 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद अनिल मौर्य के परिवार के लोगों से भेंट करने पहुंचे।