
देश की सेवा में भारतीय पुलिस वेवसाईट पर मिलेगी ३३ हजार वीर पुलिस जवानों की वीरगथा व परिस्थितियां
अनूपपुर। भारत में पुलिस सरकार की एक ऐसी एजेंसी है जो जनता की किसी भी जरूरत पर सहायतार्थ सबसे पहले पहुंचती है। फिर चाहे वे आतंकवादी या घुसपैठी हमले हो, साधारण जुर्म कानून व्यवस्था, प्राकृतिक या मानवनिर्मित आपदा या आपातकालीन मानवीय सहायता ही क्यों न हो पुलिस सदैव सबसे आगे रहती है। लेकिन हाल के देश के आंतरिक हालातों में पुलिस विभाग ने एक शौर्यवृंतात को देशवासियों के सामने रख समाज और देश में अमनचैन और सद्भावना की अलख जगाने की पहल की है। जिसमें पुलिस विभाग ने ‘देश की सेवा में भारतीय पुलिस’ (पुलिस डॉट जीओवी डॉट इन)इस वेबसाइट के माध्यम से जनसाधारण को पुलिस के द्वारा शान्ति और सद्भावना बनाए रखने के प्रयासों से अवगत कराने की कोशिश की गई है। विशिष्ट रूप से उन वीर पुलिसकर्मियों तथा जिन परिस्थितियों में उन्होंने आत्मबलिदान दिया उसे भी दर्शाया गया है। बताया जाता है कि इस वेबसाइट का रखरखाव पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक सम्मेलन के सचिवालय द्वारा किया जा रहा है। इसमें दर्शाई गई जानकारी विभिन्न राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं अन्य केन्द्रीय पुलिस संगठनों द्वारा दी गई है। यह वेबसाइट इन सभी पुलिस विभागों, बलों एवं संगठनों द्वारा चलाई जा रही निजी वेबसाइटों को देखने के लिए भी एक सरल रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें दर्शक विषय-वस्तु से संबंधित फीडबैक भी प्रदान कर सकते हैं। पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह का कहना है कि यह वेवसाईड लोगों में देश के शहीदों के प्रति सम्मान प्रदान कराने के साथ साथ हालातों में किन रास्तों को चुने के लिए प्रेरित करेगी। सम्भव है कि इसे देखने के बाद लोग अशांति और हिंसा को त्याग कर शांति और अहिंसा के लिए पहल करेंगे। उनका कहना है कि नागरिकों को सार्थक स्वच्छन्द व निर्भीक जीवन व्यतीत करने के लिए शान्तिपूर्ण वातावरण की स्थापना जो कि सरकार का प्रथम मौलिक कर्तव्य है करने में पुलिस का असीम योगदान रहा है। इन चुनौतियों का सामना करते समय कितनी ही बार पुलिस अधिकारियों को अपनी शहादत देनी पड़ती है और अपने निजी पारिवारिक दायित्वों की उपेक्षा भी करनी पड़ती है। पिछले 20 वर्षों में औसतन लगभग 700 पुलिसजन प्रतिवर्ष कर्तव्य पालन करते हुए शहीद हुए हैं। आज़ादी के बाद से अब तक लगभग 33000 से भी ज्यादा पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति दी हैए जो अन्य किसी भी सरकारी विभाग या संस्था से कहीं ज्यादा है।