नोटिस बाद भी अतिक्रमण का बढ़ रहा दायरा
अमरकंटक. श्रावणी मास के दौरान महादेव भक्त तथा नर्मदा माता के दर्शन करने वाले पर्यटकों व श्रद्धालुओं को अमरकंटक के धार्मिक स्थलों पर परेशानियों का सामना करना अब आम बात हो गई है।
मुख्य धार्मिक स्थलों में शामिल नर्मदा मंदिर मुख्य द्वार सहित सोनमूड़ा, एवं कपिलधारा के पार्किंग स्थल के लिए सुरक्षित रखे गए स्थलों सहित आसपास के हिस्सों पर व्यापारियों ने अपनी दुकानों का दायरा अब इस तरह बढ़ा लिया है कि बार बार नगरीय प्रशासन अमरकंटक द्वारा जारी किए गए नोटिस और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद भी अतिक्रमणों का दायरा सिकुडऩे के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। अब तो आलम यह है कि नगरीय प्रशासक द्वारा अतिक्रमणकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद अगले दिन अतिक्रमण जस की तस ही नजर आने लगती है। उदाहरण के लिए सोनमूड़ा व कपिलधारा धार्मिक स्थल पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा कार्रवाई के उपरांत भी बरकरार बना हुआ है। जिसके कारण ऐसे स्थलों तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों को वहां अपनी वाहनों को पार्क करने सहित खड़ा होने का स्थल भी नहीं मिल पा रहा है।
जबकि नर्मदा मंदिर तक पहुंचने वाले मुख्य रास्ते अतिक्रमण की चपेट में अब लुप्त होते नजर आ रहे हैं। इस सम्बंध में अगर श्रद्धालु किसी दुकानदार या व्यापारी के सामानों को छूता भी है तो उसे अभद्रता का शिकार बनना पड़ता है। जिसके डर के कारण श्रद्धालु या पर्यटक दुकानों के खिलाफ कुछ नहीं बोल पाते। बताया जाता है कि इस सम्बंध में स्थानीय समाजसेवियों द्वारा नपा से अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। लेकिन नपा ने भी कुछ दुकानदारों को नोटिस जारी करने की बात कही कार्रवाई से दूरी बना ली। नगरपालिका के अनुसार कुछ समय पूर्व ही 50 से अधिक अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए मंगलवार को दर्जनभर दुकानों को हटाने की भी कार्रवाई की गई थी।
रसूख के सामने सब बौने
सूत्रों का कहना है कि नपा पार्षदों व अधिकारियों की शह के कारण ऐसे व्यापारियों में भय का माहौल नहीं बनता है। यहीं कारण है कि सोनमूड़ा, कपिलधारा और नर्मदा मंदिर जैसे विहंगम स्थलों पर सिर्फ अतिक्रमणकारियों की दुकानें ही दुकाने नजर आती है। जबकि नमामि देवी नर्मदे यात्रा कार्यक्रम 2017 में पीएम नरेन्द्र मोदी के अमरकंटक आगमन के दौरान अमरकंटक की समस्त धार्मिक स्थलों से अतिक्रमण को हटा दिया गया था। लेकिन अब फिर से अतिक्रमणों का संजाल सा बिछ गया है। जिसके सामने नगरीय प्रशासन की कार्रवाई बौनी नजर आती है।
इनका कहना है
बार बार नोटिस और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन कार्रवाई के अगले दिन पुन: कब्जा हो जाता है। हाल फिलहाल लाउडस्पीकर से एनाउस करवाते हुए सात दिनों की मोहल्लत दी गई है।
सुरेन्द्र सिंह उईके, सीएमओ नगर परिषद अमरकंटक।
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