
डेढ़ किलोमीटर में डेढ़ हजार गड्ढे, पैदल चलने के भी नहीं बचे हैं पाथवेे
अनूपपुर। कहते हैं लग्जरी वाहनों में बैठे अधिकारियों को सडक़ के गड्ढों का आभास नहीं होता, जिसके कारण बदहाली की वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल जिला मुख्यालय अनूपपुर सहित अंतर्राज्यीय सीमाओं को जोडऩे वाली मुख्य मार्गो में शामिल अनूपपुर-जैतहरी मार्ग की है, जहां प्रशासनकी लापरवाही में यह सडक़ मौत की डगर बन गई है। अमरकंटक से तिपान नदी तट तक बने डेढ़ किलोमीटर लम्बी सडक़ पर डेढ़ हजार से अधिक छोटे-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। इन गड्ढों में बारिश के पानी भरने के बाद सडक़ का वजूद ही नहीं लगता है। गड्ढे इतने बड़े और गहरे हैं कि वाहन चालकों को वाहन गुजारते समय भय बना रहता है। यहां तक इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए इतना भी जगह नहीं कि पैदल आगे का सफर तय कर सके। जबकि१ अगस्त को जनदर्शन कार्यक्रम में अनूपपुर मुख्यालय पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आगमन से पूर्व पीडब्ल्यूडी विभाग ने बुद्धिमता दिखाते हुए अमरकंटक-इंदिरा तिराहा तक के कुछ गड्ढों की भराई करवा दी, लेकिन तेज बारिश की बौछार में चंद घंटों के बाद विभाग की पोल उधड़ गई। पानी के बहाव में मिट्टी और गिट्टी दोनों बह गए। लोगों का कहना है कि लग्जरी वाहनों में बैठे अधिकारियों को गड्ढों का आभास नहीं होता है। जिसके कारण नगर की वास्तविक बदहाली को नजर अंदाज कर देते हैं। जानकारी के अनुसार अक्टूबर २०१५ से ४० किलोमीटर लम्बी अनूपपुर-वेंकटनगर सीसी मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें ५७ करोड़ की लागत से निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी की ठेकेदारी व्यवस्था में कंपनी द्वारा बनाए जा रहे सडक़ में लगभग तीन साल में भी सडक़ निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सके। वहीं सडक़ की जर्जरता व जानलेवा गड्ढों तथा लोगों की रोजाना होने वाली परेशानी पर २३ जुलाई को नगर विकास मंच के बैनर तले सैकड़ों नगरवासियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। जिसमें पिछले तीन वर्षो के दौरान दर्जनों सडक़ दुर्घटनाओं सहित मौत के मामले सामने आने व तीन सालों में अमरकंटक से छुलहा फाटक तक पूरी सडक़ मेंटनेंश के अभाव में बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील होने की बात कही गई थी। उनका कहना था कि इस मार्ग पर न्यायालय, जिला अस्पताल, एक्सीलेंस विद्यालय, तहसील कार्यालय, कॉलेज सहित व्यापारिक प्रतिष्ठानें हैं, जहां हजारों की तादाद में लोगों की आवाजाही बनी होती है। बावजूद जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग लापरवाह बनी हुई है।
बॉक्स: पांच माह बाद भी नाला का निर्माण अधूरा
यह आश्चर्य की बात है कि नगरीय क्षेत्र की मुख्य सडक़ पर सडक़ निर्माण एजेंसी द्वारा पिछले पांच माह के दौरान भी लगभग डेढ़ किलोमीटर लम्बा नाला का निर्माण पूर्ण नहीं कराया जा सका है। हालात यह है कि यह सडक़ के दोनों किनारे पर बनाया जा रहा नाला पांच माह बाद भी आधा से भी कम दूरी तक निर्मित हो सका है। जबकि पांच माह से अब भी सडक़ किनारे टूटे घरों के मलवे, नाली खुदाई की मिट़्टी रखी हुई है। वहीं नाला के अभाव में पुराने टूटे नालों का पानी सडक़ों पर उतर रहा है।
वर्सन:
यह सडक़ अभी निर्माणाधीन है, नाला के निर्माण अबतक क्यों पूरा नहीं हुआ और सडक़ का काम क्यों सुस्त चल रहा है, मामले को देखती हूं। गड्ढे की भराई की व्यवस्था बनवाती हूं।
अनुग्रह पी, कलेक्टर अनूपपुर।