
कोतमा। प्रदेश में स्कूली छात्राओं की शिक्षा व सुरक्षा पर शासन द्वारा लाखों खर्च किए जा रहे है। लेकिन जमीनी हकीकत ग्रामीण क्षेत्रो के स्कूलों मे देखा जा सकता है, जहां भारी अव्यवस्थाओ के बीच बोडरी गांव में प्राथमिक एंव माध्यमिक स्कूल संचालित हो रही है। वर्ष 2006 में बने भवन अब पूरी तरह से जर्जर हालत में पहुंच चुकी है जहां बारिश के दौरान कक्षाओं के छतों से पानी दिन-रात रिसकर पानी पानी हो जाता है। जिसके कारण छात्र-छा़त्राओं को बरामदे में बैठाना पड़ता है। वहीं स्कूल में बाउंड्रीबॉल नहीं होने के कारण दिनभर असामाजिक तत्वो की हलचल बनी रहती है। जिसमें स्कूली छात्राएं पढाई में असहज मसहूस करती है। बताया जाता है कि अतिक्रमणकारियों ने स्कूल के चारो ओर कब्जा करने के साथ निर्मित शौचालय को भी तोड़ दिया है, जिससे सुविधाघर उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं। शौचालय नहीं होने के कारण छात्राएं स्कूल के बाहर खुले में शौच जाने को विवश है। जबकि स्कूल के पीछे तालाब होने के कारण बच्चों में अनहोनी की आशंका को लेकर शिक्षक भयभीत रहते हैं। विदित हो कि कुछ माह पूर्व इसी प्रकार बेलियाबड़ी शासकीय स्कूल में दो मासूमों की मौत तालाब में डूबने से हो गई थी। शिक्षकों का कहना है कि जर्जर भवन, अतिक्रमण, असामाजिक तत्वों के जमावडे सहित अन्य शिकायत विभाग के अधिकारियों को दी जा चुकी है। लेकिन अबतक कोई समाधान नहीं हुआ।
जानकारों की मानें तो भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी कोई हादसा हो सकता है। जिस ओर प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है। वहीं अतिक्रमकारियों ने भी अवैध कब्जा कर रखा है। जिसके कारण छात्राओं को स्कूल आने जाने भी परेशानी हो रही है। कुल मिलाकर प्रशासन शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा और जर्जर भवन में अध्ययन करना छात्राओं की जिंदगी खतरे में है। अगर समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी छात्राओं व शिक्षकीय स्टाफ के साथ कोई हादसा हो सकता है। इतना ही छात्राओं को निस्तार के लिए भी बाहर जाना पड़ता है, क्योंकि सुविधाघर भी उपयोग करने लायक नहीं है। ऐसे में शासन की मंशा को अधिकारियों द्वारा पलीता लगाया जाना साबित हो रहा है।