hollow overbridge in Ashoknagar मध्यप्रदेश में एक ब्रिज खोखला हो चुका है फिर भी उसपर से रोज हजारों वाहन गुजर रहे हैं।
मध्यप्रदेश में एक ब्रिज खोखला हो चुका है फिर भी उसपर से रोज हजारों वाहन गुजर रहे हैं। मामला अशोकनगर के ओवरब्रिज का है जिसे चूहों द्वारा खोखला किए जाने का दावा किया गया। मामला सामने आने के 32 दिन बाद भी ब्रिज की मरम्मत नहीं की गई है जिससे वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा बना रहता है। मिट्टी धंसकने से ओवरब्रिज के ज्वॉइंट पर गड्ढा हो चुका है, साइड से वाहन निकाले जा रहे हैं।
अशोकनगर में खोखला ओवरब्रिज कभी भी धंसक सकता है। जिस ब्रिज को अधिकारियों ने चूहों द्वारा खोखला करना बताया था, उसकी 32 दिन बाद भी मरम्मत नहीं की गई है। गड्ढे में जो मिट्टी भरी गई थी वह धंसक गई और फिर से गड्ढा हो गया है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। वहीं वाहनों को एक साइड से निकाला जा रहा है, जिससे ब्रिज पर दिनभर जाम की समस्या गंभीर हो चुकी है।
ओवरब्रिज करीब 30 साल पुराना है। पिछले साल ही इसकी मरम्मत पर 60 लाख रुपए खर्च किए गए थे लेकिन 5 नवंबर को अचानक ब्रिज धंसक जाने से गड्ढा हो गया था। अधिकारियों ने इसका कारण ब्रिज को चूहों द्वारा खोखला करना बताया था। धंसके हुए हिस्से की खुदाई कराकर उसमें मिट्टी भरकर छोड़ दिया लेकिन अब तक मरम्मत नहीं की गई है।
शहर का यह ब्रिज जिले का सबसे व्यस्त मार्ग है। एक अनुमान के मुताबिक दिन व रात मिलाकर रोजाना 10 हजार से अधिक वाहन यहां से निकलते हैं। इस समय मंडी में अनाज की आवक होने की वजह से वाहनों की संख्या और बढ़ गई है। ऐसे में ब्रिज के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत नहीं किए जाने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। खास बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारी भी रोजाना इसी ब्रिज से कई बार निकलते हैं। इसके बाद भी मरम्मत नहीं की जा रही।
ओवरब्रिज के गड्ढ़े में भरी हुई मिट्टी धंसक जाने से उसी जगह पर फिर से गड्ढ़ा हो गया है। इससे विभाग की अनदेखी पर सवाल उठने लगे हैं। यातायात पुलिस ने क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेरीकेड लगा दिया है। साथ ही इस हिस्से के पास ब्रिज पर वाहनों को एक साइड से निकाला जा रहा है। ऐसे में ब्रिज पर दिनभर जाम लग रहा है।
शिवपुरी पीडब्ल्यूडी ब्रिज एसडीओ भुवना जोशी ने इस संबंध में बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्से में हमने मिट्टी भरी थी। यदि फिर गड्ढ़ा हो गया है तो मिट्टी अंदर चली गई होगी। यहां फिर मिट्टी भरेंगे। जब मिट्टी धंसकना बंद हो जाएगी, तब उस क्षतिग्रस्त हिस्से में सीसी करने की प्लानिंग है।