Collector Saket Malviya: समर्थन मूल्य पर अनाज बेचने तीन दिन से इंतजार में खड़े किसानों की तुलाई रुकी तो धैर्य टूट गया। नाराज किसानों ने थूबोन मार्ग पर ट्रैक्टर-ट्राली अड़ाकर चक्काजाम कर दिया। करीब आधे घंटे तक चले इस हंगामे के बीच वहां से गुजर रहे कलेक्टर साकेत मालवीय खुद जाम में फंस गए। किसानों […]
Collector Saket Malviya: समर्थन मूल्य पर अनाज बेचने तीन दिन से इंतजार में खड़े किसानों की तुलाई रुकी तो धैर्य टूट गया। नाराज किसानों ने थूबोन मार्ग पर ट्रैक्टर-ट्राली अड़ाकर चक्काजाम कर दिया। करीब आधे घंटे तक चले इस हंगामे के बीच वहां से गुजर रहे कलेक्टर साकेत मालवीय खुद जाम में फंस गए। किसानों का दर्द सुन अशोकनगर कलेक्टर साकेत मालवीय का पारा चढ़ गया और उन्होंने मौके पर ही जिम्मेदार अधिकारियों की जमकर क्लास लगा दी।
मामला शहर के कोलुआ रोड स्थित 9 नंबर गोदाम का है। जहां पर धुर्रा-महाना सोसायटी का चनामसूर का खरीदी केंद्र है। गुरुवार को सिर्फ दो-तीन ट्राली अनाज तौला गया गया था और शुक्रवार को भी दो-तीन ट्राली अनाज तौलने के बाद खरीदी केंद्र ने तौल बंद कर दी। इससे इंतजार में खड़े किसानों ने दोपहर में चक्काजाम कर दिया। कलेक्टर वहां से निकल रहे थे जो जाम में फंस गए तो मौके पर पहुंचकर किसानों से जानकारी ली। किसानों का आरोप था कि केंद्र पर महज एक कांटा चल रहा है। दिनभर में सिर्फ तीन ट्रालियां तौली गईं, जबकि बाहर दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों की लंबी कतार लगी थी। कई किसानों का स्लॉट आज खत्म हो रहा था, लेकिन सोसायटी प्रबंधक ने तौल करने से हाथ खड़े कर दिए।
कलेक्टर साकेत मालवीय ने तुरंत संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और कृषि उपसंचालक को मौके पर तलब किया। एक अधिकारी को देरी पर कलेक्टर ने फोन पर ही फटकार लगाते हुए कहा, आपको काम बोझ लग रहा है या? हम यहां खड़े हैं और किसान सड़क पर हैं। आपसे पहले मुझे जानकारी लग रही है, मजाक चल रहा है या? आपको यहीं होना चाहिए। इसके बाद कलेक्टर खुद पैदल चलकर किसानों के साथ केंद्र के अंदर पहुंचे। समिति प्रबंधक को फटकार लगाई और कहा कि एक भी ट्राली बाहर खड़ी नहीं दिखनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सक्त लहजे में कहा, जब तक ट्रैक्टर खड़े हैं, चाहे दिन हो या रात, शनिवार हो या रविवार, तुलाई चालू रखिए। यह केंद्र किसानों के हिसाब से चलेगा, प्रबंधक की मर्जी से नहीं।
समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद को अधिक पारदर्शी व सुरक्षित बनाने शासन ने इस बार क्यूआर कोड आधारित खरीद की यह हाईटेक व्यवस्था की है। प्रत्येक बोरी पर क्यूआर कोड रहेगा। क्यूआर कोड स्कैन करते ही प्रत्येक बोरी की जानकारी मिल जाएगी कि यह बोरी किस जिले के किस खरीदी केंद्र और किस किसान की है। क्योंकि इसमें किसान की पूरी जानकारी दर्ज होगी। विपणन अधिकारी ने जिले के लिए छह लाख क्यूआर कोड की मांग की है, लेकिन सिर्फ 6 हजार मिले हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि रविवार तक 66 हजार क्यूआर कोड आने की उम्मीद है।
हम तीन दिन से यहां पड़े हुए हैं। रात भर मच्छर काटते हैं और दिन में धूप रहती है। कल भी सिर्फ तीन ट्रालियां तुली थीं और आज भी वही हाल रहा। जब प्रबंधक ने मना किया, तब हमें सड़क पर चक्काजाम करने मजबूर होना पड़ा। -मोहन सिंह रघुवंशी, किसान
मैंने 1 अप्रैल का स्लॉट बुक कराया था। 8 तारीख तक कोई खरीदी नहीं हुई। आज मेरा स्लॉट खत्म होने वाला था और ये लोग कह रहे हैं कि अब तौल नहीं होगी। शुक्र है कलेक्टर आ गए, नहीं तो हमारी उपज धरी रह जाती। - कपिल रघुवंशी, किसान