Gold and silver price: सोने-चांदी के दाम आसमान छूने लगे, तो सर्राफा बाजार में उन ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी जिन्होंने 10 से 15 साल पहले अपने गहने गिरवी रखे थे....
Gold and silver price: सोने-चांदी की कीमतों में आए अचानक उछाल ने जहां आम आदमी के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, वहीं जिले में सर्राफा व्यापारियों के लिए यह बढ़ी हुई कीमत गले की फांस बन गई है। क्योंकि लोग अब अपने वर्षों पुराने गिरवी रखे गहनों को उठाने पहुंच रहे हैं और गहने न मिलने पर व्यापारियों को धमका रहे हैं। आलम यह है कि जिले के मुंगावली कस्बे के व्यापारियों को परेशान होकर प्रशासन व पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाना पड़ी।
जैसे ही सोने-चांदी के दाम आसमान छूने लगे, तो सर्राफा बाजार में उन ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी जिन्होंने 10 से 15 साल पहले अपने गहने गिरवी रखे थे। कीमतों में हुए भारी इजाफे के बाद अब लोग पुराने भाव या अपनी शर्तों पर गहने वापस लेना चाहते हैं। व्यापारियों का कहना है कि इतने वर्षों बाद गहने लौटाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, जिससे हर दुकान पर विवाद की स्थिति बन रही है।
मंगलवार को मुंगावली के करीब दो दर्जन सर्राफा व्यापारी एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय और पुलिस थाने पहुंचे। जहां व्यापारियों ने शिकायत की कि ग्राहकों के आक्रामक व्यवहार के कारण वे अपनी दुकानें तक नहीं खोल पा रहे हैं। शिकायती पत्र में व्यापारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोग पुराने गहनों को उठाने के लिए जबरन दबाव बना रहे हैं। बात न मानने पर थाने में शिकायत और मारपीट की धमकी मिल रही हैं, गाली-गलौंच और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
सर्राफा एसोसिएशन ने ज्ञापन में कहा कि नियमानुसार गहने अधिकतम तीन वर्ष के लिए गिरवी रखे जाते हैं। यदि इस अवधि में ब्याज नहीं चुकाया जाता, तो वह राशि और गहने का दावा स्वत: समाप्त माना जाता है। लेकिन वर्तमान में लोग नियमों को भूलकर 10 से 15 साल पहले तक के गिरवी रखे पुराने गहनों को अब वापस मांग रहे हैं।
- -ब्याज राशि 11 माह के भीतर जमा करना अनिवार्य, गहने तीन वर्ष की अवधि उपरांत स्वत: समाप्त हो जाएंगे।
-11 माह में ब्याज जमा न करने पर ब्याज को मूल राशि में जोड़ा जाएगा, गिरवी रखने वाले को ही उठाने का अधिकार।
-गहने गिरवी रखने वाले की मृत्यु के पश्चात उसकी पत्नी, पुत्र को मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड व पंचायत का प्रमाण देना होगा।
-दुकानदार जेबरों की सुरक्षा करेगा, लेकिन भूकंप, बाढ़, आगजनी, डकैती, चोरी जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।