अशोकनगर

देश की पहली सर्विस लॉ बुक का विमोचन, न्यायधीश ने दी वकीलों और जजों को सेवा की अनूठी सीख

MP News : हाईकोर्ट जस्टिस अहलुवालिया की सीख- पक्षकार अन्नदाता है, पैसा नहीं उसे न्याय दिलाना ही हमारा धर्म है। देश की पहली सर्विस लॉ बुक का विमोचन करते हुए जस्टिस ने वकीलों और जजों को दी सेवा की अनूठी सीख।

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देश की पहली सर्विस लॉ बुक का विमोचन (Photo Source- Patrika Input)

MP News : पक्षकार हमारा अन्नदाता है। ये महत्वपूर्ण नहीं कि, उसने कम पैसे दिए या ज्यादा, महत्वपूर्ण ये है कि, हमें उसे न्याय दिलाना है। अक्सर वकील जीत जाएं तो उसे जस्टिस कहते हैं और हार जाएं तो गड़बड़, लेकिन असल न्याय वही है जो सच्चाई के सबसे नजदीक हो। ये विचार ग्वालियर हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस अहलुवालिया ने व्यक्त किए। वे मध्य प्रदेश के अशोकनगर में अभिभाषक संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर साहू के पुत्र एडवोकेट विभोरकुमार साहू द्वारा लिखित देश की पहली सर्विस लॉ पुस्तक के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

जस्टिस अहलुवालिया ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को नसीहत देते हुए कहा कि, हमें भगवान ने किसी के आंसू पोंछने इस स्थान पर बैठाया है। ये न सोचें कि, हमें कोई देख नहीं रहा, ऊपर चित्रगुप्त बैठा है जो सब देख रहा है। अगर किसी मामले में निर्णय देना है तो उसमें जल्दबाजी न करें। भले ही रात भर जागना पड़े, मेहनत करें और फिर फैसला सुनाएं। जब आपके फैसले से समाज सुखद महसूस करता है तो असली सुकून आपको भी मिलता है। उन्होंने ये भी जोड़ा कि, अगर वकील के लिए पक्षकार अन्नदाता है तो न्यायाधीशों को भी सरकार वेतन देती है। जस्टिस ने वकीलों को संबोधित करते कहा, आप एक सीढ़ी हैं, जब कोई सीढ़ी से गिरता है तो उसे कोसता भी है, इसलिए अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएं।

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सर्विस लॉ पुस्तक, 970 पृष्ठों में समाहित न्याय

देश की पहली सर्विस लॉ बुक का विमोचन (Photo Source- Patrika Input)

एडवोकेट विभोरकुमार साहू ने बताया कि, दफ्तर में बैठे हुए एक दिन विचार आया कि, एक ऐसी पुस्तक होनी चाहिए जो सर्विस लॉ के सभी मुद्दों को कवर करे और अधिकारी-कर्मचारियों को सही जानकारी दे। 970 पृष्ठों की इस किताब में जस्टिस जीएस अहलुवालिया द्वारा 2017 से 2025 के बीच सर्विस लॉ पर दिए गए 350 से अधिक ऐतिहासिक निर्णयों को शामिल किया गया है। उन्होंने कि सर्विस लॉ पर यह देशी की पहली पुस्तक है और इसे पूर्ण स्वरूप देने में करीब सात से आठ महीने का समय लगा।

आईजी ने साझा किया दिलचस्प वाकया

आईजी अरविंद सक्सेना ने किताब से जुड़ी गोपनीयता किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा, जब विभोर सलाह को मेरे पास आए तो वो चाहते थे कि, ये पुस्तक विमोचन तक गुप्त रहे। इससे मैं उस किताब को अपने दफ्तर के बजाय घर ले गया और अपने निजी कक्ष में रखा ताकि कोई उसे देख न सके। यह किताब कानूनी क्षेत्र में एक बेहतरीन सहायक पुस्तक साबित होगी। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सतीशचंद्र शर्मा, पूर्व जिला सत्र न्याधीश पवनकुमार शर्मा, कलेक्टर साकेत मालवीय, एसपी राजीवकुमार मिश्रा और सहित न्यायाधीश, वकील व कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

Published on:
09 Feb 2026 06:52 am
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