
Ashoknagar Police:एमपी के अशोकनगर में जल्दी अमीर बनने की चाहत में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्र अपराध के दलदल में उतर गए। कोतवाली पुलिस ने एक ऐसे ही अंतरराज्यीय जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार मध्यप्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश के आगरा तक जुड़े हैं। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 87,700 रुपए के नकली भारतीय नोट बरामद किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह के तीनों मुख्य आरोपी इंदौर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' की तैयारी कर रहे थे।
यह गिरोह पिछले चार-पांच सालों से सक्रिय था और अब तक बाजार में 10 से 15 लाख रुपए के नकली नोट खपा चुका है। 5 जुलाई को थाना कोतवाली पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रातीखेड़ा-रुसल्ला मार्ग स्थित प्रतीक्षालय के पास एक युवक जाली नोट लेकर उन्हें बाजार में खपाने की फिराक में खड़ा है। सूचना मिलते ही एसपी राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन और टीआई रवि प्रतापसिंह चौहान के नेतृत्व में टीम ने मौके पर दबिश दी।
पुलिस ने वहां से कुलदीप पिता महेश बघेल (22 वर्ष), निवासी ग्राम बबल्या, जिला राजगढ़ को गिरफ्तार किया। तलाशी लेने पर उसके पास से 500 और 100 रुपए के जाली नोट बरामद हुए। कड़ाई से पूछताछ करने पर कुलदीप ने बताया कि उसे यह नोट खंडवा निवासी कार्तिक पाटीदार ने दिए थे, और इन नोटों की मुख्य आपूर्ति आगरा का रहने वाला हेमंत करता है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कार्तिक और हेमंत को रात में शिवपुरी के पास से धर दबोचा।
पुलिस जांच में सामने आया है कि नकली नोटों की छपाई आगरा या मध्यप्रदेश के बाहर अन्य स्थानों पर की जाती थी। आगरा का हेमंत यह खेप लेकर आता था और कार्तिक तथा कुलदीप को सप्लाई करता था। बाजार में नोट खपाने का इनका तरीका बेहद शातिर था। ये लोग 1:3 के अनुपात में नकली नोट बाजार में उतारते थे, यानी 500 रुपए असली के बदले 1500 रुपए के नकली नोट देते थे। इसके अलावा, ये लोग असली नोटों की गड्डियों के बीच में भी नकली नोट फंसाकर चला देते थे। पुलिस ने इनके पास से 500 रुपये के 85 और 100 रुपये के 432 जाली नोट कुल 517 नोट जब्त किए हैं, जिनकी कीमत 87,700 रुपए है।
नकली नोट के कारोबार से जुड़े इन तीनों आरोपियों की अब पुलिस न्यायालय से सात दिन की पुलिस रिमांड मांगने की तैयारी में है और उन्हें रिमांड पर लेकर नेटवर्क की जानकारी ली जाएगी। ये नोट कहाँ छपते थे और इनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी पता किया जाएगा कि अशोकनगर जिले में यह लोग किस को नोट सप्लाई करने आए थे। इससे रिमांड के दौरान इस राज की परतें खुलेंगी।
बरामद किए गए जाली नोटों में सिक्युरिटी थ्रेड (बीच की लाइन), लिखावट, छपाई और आरबीआई के वाटरमार्क में असली नोटों की तुलना में स्पष्ट अंतर है। असली में होते हैं से निशान....
- नोट को किसी लाइट के सामने रखने पर 500 लिखा हुआ दिखता है।
- आंख के सामने 45 डिग्री के एंगल पर नोट रखेंगे तो 500 लिखा दिखेगा।
- नए नोट पर देवनागरी में 500 लिखा होता है।
- महात्मा गांधी की तस्वीर का अंकन साफ दिखेगा।
- नोट को हल्का मोड़ेंगे तो सिक्योरिटी थ्रीड का कलर हरा से नीला हो जाता है।
-गवर्नर के सिग्नेचर, गारंटी क्लॉज, प्रॉमिस क्लॉज और आरबीआई का लोगो दाहिनी तरफ दिखेगा। महात्मा गांधी की तस्वीर है और इलेक्ट्रोटाइप वाटरमार्क भी है।
- ऊपर में बाई तरफ और नीचे सबसे दाहिनी तरफ दर्ज नंबर बाएं से दाएं की तरफ बड़े होते जाते हैं।
- वाहिनी तरफ अशोक स्तम्भ है, दाहिनी तरफ सर्कल बॉक्स में 500 लिखा है। दाहिनी और बाई तरफ 5 ब्लीड लाइंस है।
-पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार तीनों आरोपी 12वीं पास हैं और इंदौर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रहे थे।
-तीनों आरोपी इंदौर की कल्पवृक्ष कोचिंग और एलन जैसी बड़ी कोचिंग संस्था में पढ़ाई कर नीट की तैयारी कर रहे थे।
-पुलिस के मुताबिक खंडवा निवासी आरोपी कार्तिक पाटीदार खुद को एमबीबीएस का छात्र बताता था, लेकिन पुलिस जांच में यह दावा फर्जी निकला।
- आरोपियों ने पूछताछ में कबूला है कि वे अब तक 10 से 15 लाख रुपए के नकली नोट इंदौर, उज्जैन और अन्य जिलों में खपा चुके हैं।
आगरा व अन्य राज्यों से जुड़े हैं तार, नेटवर्क खंगाल रहे हैं। यह एक बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क है। आगरा का रहने वाला हेमंत नोटों की आपूर्ति करता था, जिसे ये छात्र कमीशन एजेंट बनाकर बाजार में 1:3 के अनुपात में खपाते थे। पिछले 4 व 5 सालों से ये इस कारोबार में संलिप्त हैं। हमने 87,700 रुपए के नकली नोटों के साथ तीनों को गिरफ्तार किया है। अभी पुलिस रिमांड ली जा रही है, जिससे यह पता लगाया जाएगा कि ये नोट कहाँ छपते थे और इनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। आम जनता से भी अपील है कि संदिग्ध नोट दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें। - राजीव कुमार मिश्रा, एसपी अशोकनगर
गिरफ्तार किए गए दोनों युवक 12वीं पास हैं और इंदौर में कल्पवृक्ष व एलन जैसी कोचिंग में रहकर नीट की तैयारी कर रहे थे। खंडवा वाला युवक तो खुद को एमबीबीएस का छात्र बताता था, जो फर्जी निकला, वह भी 12वीं पास है। जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में ये लोग आगरा के तस्कर के संपर्क में आए। हमने सात दिन की पुलिस रिमांड की मांग की है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ तक पहुंचा जा सके।- रविप्रताप सिंह चौहान, थाना प्रभारी कोतवाली अशोकनगर