
Success Story: जिंदगी के उलझे ताने-बाने के बीच हौसले के करघे से नई तकदीर कैसे बुनी जाती है, यह प्राणपुर की किरण कोली से सीखें। गरीबी और पारिवारिक बोझ तले दबी किरण आज सिर्फ बुनकर नहीं, बल्कि देशभर में चंदेरी साड़ी का चमकता चेहरा हैं। उनकी बुनी कंगना साड़ी ने परिवार को नया मुकाम दिया और घर को क्राफ्ट विलेज का ऐसा जीवंत केंद्र बना दिया, जिसे देखने पर्यटक खिंचे चले आते हैं।
गरीब परिवार में जन्मीं किरण ने बचपन से माता-पिता को करघे पर पसीना बहाते देखा। अभावों के बीच इस पुश्तैनी कला को उन्होंने अपनी पहचान बनाया। शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन किरण ने करघा नहीं छोड़ा। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वह दिन-रात सूत पिरोती रहीं। उनकी अथक मेहनत, बारीक डिजाइन और गुणवत्ता ने ही उन्हें चंदेरी साड़ी बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाई।
किरण ने चंदेरी साडिय़ों में नए प्रयोग कर कंगना, समंता, जंगला और स्कॉट बॉर्डर जैसी वैरायटी तैयार कीं। इनमें कंगना साड़ी टर्निंग पॉइंट बनी, जिसकी खूबसूरती ने ग्राहकों का दिल जीत लिया। हुनर पर भरोसे के चलते किरण स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहीं। वे खुद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और जयपुर जैसे महानगरों में गईं और साडिय़ों का सफल व्यापार किया।
वस्त्र मंत्रालय द्वारा प्राणपुर में हैंडलूम क्राफ्ट विलेज की स्थापना से किरण की मेहनत को नया आसमान मिला। आज उनका घर सिर्फ मकान नहीं, बल्कि चंदेरी कला प्रेमियों के लिए प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। हजारों पर्यटक उनके घर पहुंचकर करघे पर साड़ी बुनने की बारीक प्रक्रिया करीब से देख चुके हैं। किरण खुद पर्यटकों को सूत से शानदार चंदेरी साड़ी बनने तक का पूरा सफर समझाती हैं।
किरण का सफर प्रमाण है कि इरादों में जान हो, तो विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ते खुद बनते हैं। करघे पर धागे पिरोते हुए उन्होंने सिर्फ साडिय़ां नहीं बुनीं, बल्कि परिवार के सपनों को आकार दिया। आम गृहणी से देश के बड़े शहरों तक कारोबार फैलाने वाली किरण की कहानी, महिला सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता की ऐसी इबारत है जो हर संघर्षशील महिला को नई उम्मीद देती है।