अशोकनगर

डीजल पर 10 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च कर ही हो पाएगी रबी की बोवनी

पिछले साल की तुलना में प्रति लीटर डीजल पर बढ़े 13.10 रुपए, 15 अक्टूबर 2017 की तुलना में 18 रुपए 94 पैसे मंहगा हुआ डीजल। किसान बोले फसलों की रेट तो लगातार घट रहीं, लेकिन डीजल के बढ़ते हुए दाम खेती को बना रहे हैं नुकसान का धंधा।

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Sep 28, 2018
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अशोकनगर. शासन भले ही खेती को लाभ का धंधा बनाने का दावा कर रहा हो, लेकिन डीजल के बढ़े हुए दाम किसानों की मुसीबत बन गए हैं। जहां फसलों में नुकसान से तो किसान परेशान हैं ही, वहीं फसलों की रेट भी बहुत कम है। इससे किसान खेती में खर्च अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।

वहीं जिले के किसानों को पिछले साल की तुलना में रबी सीजन की बोवनी के लिए डीजल पर 10 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च करना पड़ेंगे। महंगी होती खेती को देख किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
पिछले साल 27 सितंबर को जिले में डीजल की रेट 65.35 रुपए लीटर थी, जो इस बार 78.45 रुपए है। पिछले साल की तुलना में इस बार डीजल किसानों 13.10 रुपए मिल रहा है। वहीं यदि 15 अक्टूबर 2017 की रेट से तुलना करें तो डीजल की रेट 59.51 रुपए थी। इस हिसाब से सालभर में डीजल 18 रुपए 94 पैसे मंहगा हो गया है। जबकि किसानों को इसी सीजन में सबसे ज्यादा डीजल की जरूरत पड़ती है।

रबी सीजन की बोवनी के लिए किसानों को कम से कम दो बार कल्टीवेटर और एक बार सीडड्रिल चलाना पड़ेगी। इससे जिले के प्रत्येक किसान को रबी सीजन की सिर्फ बोवनी के लिए ही तीन बार डीजल की जरूरत पड़ती है। लेकिन डीजल के बढ़े हुई रेट की वजह से इस बार किसानों को डीजल पर ज्यादा रुपए खर्च करना पड़ेंगे, तभी वह अपने खेतों में रबी सीजन की फसल की बोवनी कर पाएंगे।


ऐसे समझें जिलेभर में बोवनी में 10 करोड़ का ज्यादा खर्च-
जिले में दो लाख 84 हजार 850 हेक्टेयर (करीब 14.24 लाख बीघा जमीन) में इस बार रबी सीजन की बोवनी होना है। दो बार कल्टीवेटर और एक बार सीडड्रिल चलाने के लिए तीन बार ट्रेक्टर चलेगा। इससे बोवनी के लिए तीन बार में ट्रेक्टर करीब 42.72 लाख बीघा में चलेंगे। प्रत्येक बीघा पर टे्रक्टर में कम से कम 1.25 लीटर डीजल जल जाता है। इससे 42.72 लाख बीघा पर 53.40 लाख लीटर डीजल खर्च होगा।

पिछले साल की रेट 59.51 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से डीजल पर किसानों के 31.77 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, वहीं इस बार 78.45 रुपए लीटर के हिसाब से बोवनी पर किसानों के 41.89 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे पिछले साल की तुलना में किसानों को रबी सीजन की बोवनी के लिए सिर्फ डीजल पर ही 10 करोड़ 12 लाख रुपए ज्यादा खर्च करना पड़ेंगे। तब जाकर इस बार जिले में रबी सीजन की बोवनी हो पाएगी। वहीं खाद-बीज और दवाओं पर होने वाला खर्चा अलग है।

लेकिन फसलों की कीमत हर साल घट रही-
किसानों का कहना है कि प्राकृतिक प्रकोपों की वजह से जिले में किसान रबी और खरीफ सीजन की फसलों में लगातार पांच साल से नुकसान की मार झेल रहे हैं। इससे जहां जिले में फसलों का उत्पादन घटकर आधा रह गया है, तो वहीं फसलों की रेट भी लगातार घटती जा रही है।

चार साल पहले आठ हजार रुपए क्विंटल पर बिकने वाला उड़द पिछले साल जहां सीजन के समय पर 4200 रुपए क्विंटल तक बिक गया था, लेकिन इस बार 3200 से 3300 रुपए क्विंटल ही बिक रहा है। वहीं सोयाबीन भी 2400 रुपए क्विंटल पर बिक रहा है। इससे फसलों में नुकसान के साथ किसानों को कीमतों में नुकसान की मार भी झेलना पड़ेगी।

किसान बोले मंहगाई के नाम पर घट जाते हैं फसलों के दाम-
किसानों का कहना है कि हर साल ही मंहगाई के नाम पर सिर्फ फसलों के दाम घटा दिए जाते हैं। जबकि यदि पिछले दस साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो खेती में इस्तेमाल होने वाले खाद, दवाईयां, यूरिया सहित खेती के उपकरणों की कीमत दो गुने से ज्यादा हो चुकी है और डीजल की रेट भी डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ गई है।

हर बार राजनैतिक पार्टियां डीजल-पेट्रोल का नाम लेकर मंहगाई का विरोध करती हैं और मंहगाई के नाम पर किसानों की फसलों के दाम घटवा दिए जाते हैं। इससे अब खेती लाभ की जगह लगातार पांच साल से जिले के किसानों के लिए नुकसान का धंधा बनी हुई है।

खास-खास-
जिले में डीजल की रेट - 78.45 रुपए
सितंबर 17 को डीजल - 65.35 रुपए
15 अक्टूबर 17 को डीजल - 59.51 रुपए
रबी का रकबा - 284850 हेक्टेयर
पिछले साल डीजल पर खर्च - 31.77 करोड़ रुपए
अब डीजल पर खर्च - 41.89 करोड़ रुपए
साल भर में भार - 10.12 करोड़ रुपए

डीजल की रेट पिछले साल की तुलना में बहुत ज्यादा हो गई है। किसानों को रबी सीजन की बोवनी के लिए तीन बार डीजल खर्च करना पड़ता है, तब बोवनी हो पाती है। फसलों में पांच साल से नुकसान हो रहा है और फसलों की कीमत भी घटती जा रही है। हर बार मंहगाई के नाम पर सिर्फ किसानों की फसलों की रेट घटा दी जाती है। इससे खेती अब नुकसान का धंधा बन गई है, लेकिन कोई भी इस पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है और किसान मुसीबत झेल रहे हैं।
जगराम सिंह यादव, प्रांत सहमंत्री भारतीय किसान संघ

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Published on:
28 Sept 2018 05:37 pm
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