
नीलम सिंह यादव
Ashoknagar news: सफलता केवल किसी वातानुकूलित दफ्तर या सरकारी नौकरी की मोहताज नहीं होती। इस बात को एमपी में अशोकनगर जिले के बंगलाचौराहा निवासी 42 वर्षीय परशुराम प्रजापति ने सच साबित कर दिखाया है। उच्च शिक्षित होने व कई डिग्रियां हासिल करने के बावजूद परशुराम ने रोजगार के लिए सिर्फ नौकरी का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद का रास्ता चुना। आज वह सड़क किनारे समोसा-कचौड़ी व कुल्फी का ठेला लगाकर न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गर्व से कहते हैं कि वह बेरोजगार नहीं हैं। फुटपाथ से शुरु इस सफर से आज वे एक सफल इंसान बन चुके हैं।
परशुराम प्रजापति की शिक्षा किसी भी बड़े अधिकारी से कम नहीं है। उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए, फिर एमएसडब्ल्यू और पीजीडीसीए जैसी डिग्रियां भी की हैं। यही नहीं साल 2010 में उन्होंने बीएड भी किया। इतनी डिग्रियां होने के बाद आमतौर पर युवा सिर्फ नौकरी के पीछे भागते हैं, लेकिन परशुराम ने अपने आत्मविश्वास से अलग लकीर खींची।
परशुराम ने काम को कभी छोटा नहीं समझा। उन्होंने साल 2001 से ही गर्मियों के मौसम में कुल्फी बेचने का सीजनेवल काम शुरु कर दिया था। इसके बाद, साल 2007 से उन्होंने सड़क किनारे नाश्ते (समोसा-कचौड़ी) का ठेला लगाना शुरु किया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और उनका यह ठेला अब स्थाई काम बन एक चुका है। अपनी इसी छोटी सी शुरुआत की बदौलत आज उन्होंने अपनी खुद की संपत्ति और मकान भी तैयार कर लिया है, और उन्हें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती।
डिग्रियां लेने के बाद बेरोजगारी का रोना रोने वालों के लिए परशुराम का नजरिया एक कड़ा जवाब है। उनका मानना है कि युवाओं में आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी के कारण ही वे खुद को बेरोजगार महसूस करते हैं। परशुराम के अनुसार, नौकरी से आप सिर्फ आत्मनिर्भर होकर अपना जीवनयापन कर सकते हैं, लेकिन स्वरोजगार और कारोबार में आप अपनी मर्जी से ऊंची उड़ान भर सकते हैं।