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Ashonagar News: एक अर्थी पर निकली चार बच्चों की अंतिम यात्रा तो रो पड़ा गांव, एक झटके में उजड़ा परिवार

Four Brothers Death: चारों बच्चों की उम्र 10 साल से कम है, मां कुछ दिन पहले मायके गई थी और पिता काम करने के लिए घर से बाहर गए थे, दादी के घर में थे चारों बच्चे।
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Ashoknagar Four Brothers Death

four brothers found dead well, इसी कुएं में मिले बच्चों के शव (Source-Patrika)

Ashoknagar Four Brothers Death: मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील के विक्रमपुर गांव में सोमवार को ऐसा हृदयविदारक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक मजदूर परिवार के चार मासूम बच्चे खेल-खेल में घर के पास बने कच्चे कुएं में डूब गए। इस घटना में चारों सगे भाइयों की मौत से पलभर में पूरा वंश ही खत्म हो गया। चारों बच्चों के शव जब एक अर्थी पर निकले तो पूरा गांव रो पड़ा।

कुएं में मिले 4 बच्चों के शव

चंदेरी के विक्रमपुर गांव निवासी 40 वर्षीय बलवीर कुशवाह मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। पत्नी पिछले पांच दिनों से मायके गई हुई थी। बलवीर सुबह करीब 9 बजे खेत पर मजदूरी करने चला गया। उनके चार बेटे देव 9 वर्ष, त्रिदेव 7 वर्ष, महादेव 6 वर्ष और प्रियांश 4 वर्ष घर पर अकेले थे। खेलते-खेलते चारों बच्चे घर से करीब 200 मीटर दूर अपनी निजी भूमि पर बने छोटे से कच्चे कुएं के पास पहुंच गए। कुआं करीब 10 फीट गहरा था और उसमें 9 फीट तक पानी भरा था। सरपंच पति कमलेश जैन और ग्रामीणों के मुताबिक आशंका जताई जा रही है कि खेलते समय कोई एक बच्चा कुएं में गिरा होगा और उसे बचाने के प्रयास में एक के बाद एक चारों भाई गहरे पानी में डूब गए।

कुएं में दिखा बच्चे का शव

दोपहर करीब ढाई से तीन बजे के बीच बलवीर के बड़े भाई सोमसिंह कुशवाह उधर से गुजरे। उनकी नजर कुएं पर पड़ी तो सबसे छोटे 4 वर्षीय भतीजे प्रियांश का शव पानी में नजर आया। उन्होंने बदहवास होकर तुरंत बलवीर को सूचना दी। दौड़ता हुआ पिता और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और जब कुएं की तलाशी ली तो एक-एक कर बाकी तीनों बच्चों देव, त्रिदेव और महादेव के शव भी मिले, जिन्हें बाहर निकाला गया।

एक ही अर्थी पर निकली चारों की अंतिम यात्रा

घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार दिलीप दारोगा और थाना प्रभारी प्रशांत यादव मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को चंदेरी सिविल अस्पताल भिजवाया। पोस्टमार्टम के बाद चारों बच्चों के शव परिजनों को सौंपे गए, तो चीख-पुकार मच गई। सरपंच पति कमलेश जैन ने बताया कि बच्चों की उम्र बहुत छोटी थी, इसलिए हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उनका दाह संस्कार करने के बजाय उन्हें जमीन में दफनाया गया है। चारों मासूम भाइयों को एक ही अर्थी पर रखकर अंतिम विदाई दी गई।