G20 Summit में पीएम मोदी ( PM Modi ) और अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ( Donald Trump ) की मुलाकात के दौरान नहीं दिखी पहले जैसी गर्मजोशी इस बार बेहद औपचारिक माहौल में हुई बात
ओसाका। दुनिया भर के नेताओं को गले लगाकर मुरीद बना लेने वाले पीएम मोदी की हग डिप्लोमेसी का जादू क्या उतार पर है ? दुनिया भर में कई नेताओं के साथ मोदी की मुलाकातों पर गौर करें तो ऐसा नहीं लगता, लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मामला थोड़ा अलग है।
जापान के ओसाका शहर में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और द्विपक्षीय वार्ता की। लेकिन इन मुलाकातों में इसमें सबसे चर्चित और अहम रही अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात।
दरअसल, दो दिवसीय जी-20 सम्मेलन का औपचारिक आगाज बीते शुक्रवार को हुआ था। पहले दिन कई देशों के नेताओं ने आपसी संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए द्विपक्षीय वार्ताएं की। इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भी एक के बाद एक कई देशों के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात की।
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लेकिन जो मुलाकात सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रही, वह थी ट्रंप के साथ मोदी की मुलाकात। प्रधानमंत्री मोदी अपने 'हग डिप्लोमेसी' ( Hug diplomacy ) के लिए जाने जाते हैं यानी कि गले लगाकर हर किसी को अपना मुरीद बना लेते हैं।
ऐसा इसलिए कहा जाता जाता है कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक मोदी ने जिन देशों की यात्रा की वहां पर 'हग डिप्लोमेसी' का असर खूब दिखा। हां ये अलग बात है कि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस हग डिप्लोमैसी की जमकर खिल्ली उड़ाई है।
चुनाव में जीत के बाद पहली बार डोनाल्ड ट्रंप से मिले नरेंद्र मोदी
इस बार जी20 की बैठक से इतर मोदी और ट्रंप मिले तो जरुर लेकिन वह गर्माहट नहीं दिखी जो वाइट हाउस में पिछली बार दिखी थी। इस बार न तो मोदी ने गले लगाने की कोशिश की और न ही ट्रंप इसके लिए बेताब दिखे। दोनों ही नेताओं ने औपचारिक तौर पर हैंड शेक किया और फीकी मुस्कान के साथ एक दूसरे का अभिवादन किया।
यह पहला मौका था जब लोकसाभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी ट्रंप से मिल रहे थे। चुनाव में भारी जीत दर्ज करने पर ट्रंप ने फोन कर मोदी को बधाई दी थी और साथ मिलकर काम करने पर सहमति भी जताई थी। लेकिन जापान के ओसाका में दोनों की मुलाकात की कुछ सेकेंड की तस्वीरों ने बहुत कुछ साफ कर दिया।थोडी देर की मुलाकात ने बयान कर दिया कि दोनों देशों के बीच ईरान, टैरिफ और एस 400 मुद्दे पर गतिरोध गहरे हो रहे हैं और फिलहाल सबकुछ ठीक नहीं है।
क्या है कारण?
वैसे तो माना जाता है कि ट्रंप और मोदी के बीच दोस्ती वाले संबंध है। यहाँ तक कि ट्रंप की बेटी इवांका ने भी दूसरी बार पीएम बनने पर नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी और काफी तारीफ की थी। लेकिन मोदी की इंडिया फर्स्ट और ट्रंप की अमरीका फर्स्ट की नीति ने शायद दोनों के बीच दूरियां बढा दी है।
भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क बढाने के जवाब में भारत ने भी 28 अमरीकी उत्पादों पर टैरिफ बढा दिया। इसको लेकर ट्रंप नाराज हैं। ट्रंप ने जी 20 समिट में भाग लेने से पहले एक ट्वीट किया और कहा कि बढे हुए टैरिफ को अमरीका स्वीकार नहीं करेगा। इस पर भारत ने भी सख्त संदेश दिया कि इस मुद्दे एकतरफा विचार नहीं किया जा सकता है। लिए दोनों देशों को काम करना होगा।
इसके अलावा रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने को लेकर भी अमरीका भारत से नाराज है। अमरीका चाहता है कि भारत रूस से S-400 मिसाइल न खरीदे और सौदा रद्द कर दे। इसपर भी भारत ने साफ कर दिया कि वह अमरीका के साथ आगे बढना चाहता है पर रूस के साथ हुए सौदे को रद्द नहीं किया जा सकता है।
पहले भी इस मुद्दे पर ट्रंप ने भारत पर प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी थी। पर पीएम नरेंद्र मोदी मे साफ कर दिया कि 'ये नया भारत है.. किसी के सामने झूकेगा नहीं।' सूत्रों की मानें तो अमरीका चाहता था कि ओसाका में मोदी ट्रंप के बीच S400 सौदे को लेकर चर्चा हो, लेकिन भारत ने इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने से साफ इनकार कर दिया।
कहते हैं कि दुनिया में कूटनीतिक समीकरण बदलने में देर नहीं लगती। अब आगे यह देखना दिलचस्प होगा कि पीएम मोदी की पुरानी हग डिप्लोमैसी ट्रंप के सामने असरदार साबित होती है या फिर समय-चक्र में उसका रंग फीका पड रहा है।
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