श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नाम पर बने इस हवाईअड्डे की लागत 1500 करोड़ रुपए थी। इसे अब भारत और श्रीलंका मिलकर चला सकते हैं।
कोलंबो। दक्षिण श्रीलंका में स्थित मटाला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा दुनिया का सबसे खाली हवाईअड्डा बन चुका है। चीन की मदद से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब श्रीलंका के लिए घाटे का सौदा बन गया है। यहां से उड़ने वाली एकमात्र अंतरराष्ट्रीय उड़ान भी नुकसान और सुरक्षा चिंताओं के चलते बीते दिनों बंद हो चुकी है। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नाम पर बने इस हवाईअड्डे की लागत 1500 करोड़ रुपए थी। इसे अब भारत और श्रीलंका मिलकर चला सकते हैं।
श्रीलंकाई संसद से मिली जानकारी
श्रीलंका की संसद में पूछा गया था कि क्या मटाला हवाईअड्डे को पूरी तरह बेच दिया जाएगा। इसके जवाब में परिवहन उप-मंत्री अशोक अभयसिंघे ने संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया, 'नुकसान में होने के बावजूद हवाईअड्डे को कभी भी बेचा नहीं जायेगा। भारत ने इस हवाईअड्डे को श्रीलंका-भारत संयुक्त उद्यम के तौर पर चलाने की इच्छा जताई है। इसे एक संयुक्त उद्यम बनाने पर बातचीत हो सकती है। इस संबंध में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल कोलंबो आया हुआ है।'
पहले नाकाम हो चुकी है श्रीलंका की कोशिश
श्रीलंका सरकार ने 2017 में इस हवाईअड्डे को मुनाफा कमाने वाला बनाने के लिए निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। हालांकि, इसके लिये कोई प्रस्ताव नहीं मिला था। हालांकि भारत सरकार की तरफ से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। आपको बता दें की चीन की मदद से ही बना हंबनटोटा बंदरगाह भी चीन के लिए नुकसान का सौदा बन चुका है। इस बंदरगाह से साल-दर-साल श्रीलंका का कर्ज बढ़ता जा रहा है और भारत समेत तमाम देशों ने इसमें निवेश करने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।