
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों व हिन्दुओं के साथ हो रहे जुल्म की कहानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब एक ताजा मामले ने फिर से पाकिस्तान में हिन्दुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी शहर में एक स्कूल के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रधानाचार्य को ईश-निंदा के आरोप के बाद हुए दंगों के चलते गिरफ्तार कर लिया गया।
प्रधानाचार्य नोटन लाल पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर एक छात्र के साथ ईश-निंदा की और इसके बाद रविवार को उन पर भीड़ ने हमला किया। कट्टरपंथियों ने इसी बहाने एक मंदिर को भी निशाना बनाया और हिंदू समुदायों के मालिकों की पांच दुकानों में भी तोड़-फोड़ की गई।
विवादित धार्मिक नेता अब्दुल हक का नाम आया सामने
सुकुर अतिरिक्त महानिरीक्षक जमील अहमद के अनुसार, सिंध पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले एक विद्यार्थी के पिता अब्दुल अजीज राजपूत ने ईश-निंदा को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज कराई जिसमें उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की। इसके बाद घोटकी जिले में प्रदर्शन हुए।
इस प्रदर्शन के बाद पुलिस ने नोटन लाल को गिरफ्तार कर लिया। जबकि कट्टरपंथी जब सड़क जाम कर रहे थे और मंदिर व दुकानों में तोड़फोड़ कर रहे थे उस वक्त पुलिस तमाशबीन बनी सबकुछ देख रही थी।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से न्याय होगा।
विवादित धार्मिक नेता अब्दुल हक उर्फ मियां मिट्ठू की प्रांत में कथित तौर पर हिंदू लड़कियों के धर्म परिवर्तन कराने में प्रमुख भूमिका रही है। बताया जाता है कि घोटकी में दंगे करवाने में उसके समर्थकों की संलिप्तता रही है।
दंगे का नेतृत्व मियां मिट्ठू का बड़ा भाई मियां असलम कर रहा था। हालांकि मियां मिट्ठू ने कहा कि हिंसा में उनकी संलिप्तता नहीं रही है। उन्होंने कहा कि मैंने प्रदर्शन का नेतृत्व नहीं किया।
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