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मलक्का स्ट्रेट के पास भारत बनाएगा पोर्ट, चीन की बढ़ेगी चिंता

भारत अब मलक्का स्ट्रेट के पास कुछ ऐसा करने जा रहा है जिससे चीन की चिंता बढ़ेगी। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 08, 2026

Strait of Malacca

मलक्का स्ट्रेट (File Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के इंडोनेशिया (Indonesia) दौरे के दौरान भारत-इंडोनेशिया ने सबांग पोर्ट (Sabang Port) को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमति जताई है। इस समझौते से भारत (India) को मलक्का स्ट्रेट (Strait of Malacca) के दोनों ओर रणनीतिक मौजूदगी मिलेगी। मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और चीन (China) के ऊर्जा आयात के लिए भी बेहद अहम माना जाता है।

क्यों अहम है सबांग पोर्ट?

सबांग पोर्ट इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के उत्तरी सिरे के पास वेह द्वीप पर स्थित है। यह भारत के प्रस्तावित ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट हब से 100 समुद्री मील से भी कम दूरी पर स्थित है और मलक्का स्ट्रेट के उत्तरी प्रवेश द्वार की तरफ है। इसी मार्ग से दुनिया के समुद्री व्यापार का लगभग 25-40% हिस्सा गुज़रता है, जबकि चीन के करीब 80% कच्चे तेल का आयात भी इसी रास्ते से होता है। ऐसे में भारत इस मार्ग को दोनों किनारों पर अब मौजूद रहेगा।

चीन की बढ़ेगी चिंता

चीन के रणनीतिक एक्सपर्ट्स पिछले दो दशकों से मलक्का स्ट्रेट पर चीन की निर्भरता को 'मलक्का दुविधा' बताते रहे हैं। भारत इसके करीब ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। इससे भारत को मलक्का के पश्चिमी प्रवेश द्वार पर स्थायी व्यावसायिक और सैन्य आधार मिलेगा। यह ऐसे समय में हो रहा है जब चीन अपनी नौसैनिक गतिविधियाँ हिंद महासागर में लगातार बढ़ा रहा है। मलक्का स्ट्रेट में भारत का प्रभाव बढ़ने से चीन की चिंता बढ़ेगी।

व्यापार से कहीं ज़्यादा रणनीतिक महत्व

भारतीय रणनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सबांग पोर्ट सिर्फ व्यापारिक परियोजना नहीं है, बल्कि इसका रणनीतिक महत्व कहीं ज़्यादा है। विकसित होने के बाद यहाँ निगरानी प्रणाली, नौसेना के लिए लॉजिस्टिक केंद्र और ग्रेट निकोबार में विकसित हो रहे नौसैनिक-वायुसेना ढांचे के रूप में सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। भारत-इंडोनेशिया 2002 से इस क्षेत्र में समन्वित नौसैनिक गश्त करते आ रहे हैं।

पूर्वी एशिया के बाजार तक पहुंच

सबांग पोर्ट के ज़रिए बंगाल की खाड़ी में समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने की भी योजना है। यह पोर्ट चेन्नई, कोलकाता, पारादीप और हल्दिया जैसे भारतीय बंदरगाहों को दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। भारत-इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 30 बिलियन डॉलर का है जो यह भारत-ब्रिटेन से भी ज़्यादा है। 2030 तक इसे 100 बिलियन डॉलर तक करने का लक्ष्य है।