फर्जी बैंक खाते मामले में पाक के पूर्व राष्ट्रपति और उनकी बहन का नाम अरबों के इस घोटाले के लाभार्थियों की सूचि में शामिल था।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उनकी बहन फरयाल तालपुर मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी बैंक खाते मामले में संघीय जांच एजेंसी की एक संयुक्त टीम के सामने पेश हुए। बता दें, ये मामला 35 अरब रुपए के घोटाले से संबंधित है। बता दें, पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने जुलाई में 63 वर्षीय जरदारी और उनकी बहन को अरबों रुपए के कथित घोटाले के लाभार्थियों की सूची में शामिल किया था। इसके बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह-अध्यक्ष के करीबी सहयोगी और प्रसिद्ध बैंकर हुसैन लवाई को गिरफ्तार किया गया था।
पाकिस्तान के एक प्रमुख मीडिया हाउस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि- एफआईए ने शनिवार को पूर्व राष्ट्रपति और उनकी बहन को सोमवार को एजेंसी के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा था। पेश होने के लिए उन्हें चौथी बार सम्मन भेजा गया था। पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और राजा परवेज अशरफ सहित पीपीपी के कई अन्य नेताओं के साथ जरदारी और उनकी बहन कड़ी सुरक्षा के बीच एफआईए कार्यालय पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार- एफआईए की एक टीम ने दोनों भाई-बहन से फर्जी खातों और लेन-देन के बारे में पूछताछ की।
पूछताछ के बाद एफआईए कार्यालय से बाहर आते हुए जरदारी ने कहा कि- ‘यह फर्जी मामला है और दुर्भाग्यपूर्ण है कि नवाज शरीफ के कार्यकाल में मेरे खिलाफ यह मामला बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला मियां साहब के आदेश पर दर्ज किया गया था।’
बता दें, जरदारी 2008 से 2013 के बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे। कराची की एक स्थानीय बैंकिंग अदालत की ओर से की गई जांच के बाद जरदारी और अन्य फरार संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए 17 अगस्त को गैर जमानती वारंट जारी किया था। अदालत ने आदेश दिया कि संदिग्धों को गिरफ्तार किया जाए और चार सितंबर तक उसके सामने पेश किया जाए।