
नई दिल्ली। हाल ही में पाकिस्तान ने ऐसे स्टैंप जारी किए,जिसमें उसने भारत की छवि खराब करने की कोशिश की है। उसने पाक अधिकृत कश्मीर में मारे गए आतंकियों की तस्वीर जारी करके भारत को दुनिया के सामने अत्याचारी बताया है। मगर इन तस्वीरों वजह से उसकी पोल खुल गई है। दरअसल हाल ही में एक खास प्रोपगैंडा के तहत जारी किए 20 पोस्टल स्टैंप को शीर्षक दिया गया है 'भारत अधिकृत कश्मीर में भारत द्वारा की जाने वाली ज्यादतियां'। इन्हीं स्टैंप में से एक में हिज्बुल मुदाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी को शहीद बताया गया है। मगर पाकिस्तान ने ये सब करने में एक गलती कर दी। पाकिस्तान ने कुछ तस्वीरें कश्मीरी पंडितों और सिख पीड़ितों पर किए गए पाक समर्थित हमलों को भी भारत द्वारा किए गए हमलों के तौर पर दिखाया है, जबकि उन तस्वीरों की सच्चाई जगजाहिर है। मीडिया में इस स्टैंप को लेकर पाकिस्तान खुद घिरता नजर आ रहा है।
फिलीस्तीन की तस्वीर को कश्मीर का बता डाला था
याद है कैसे पिछले साल पाकिस्तान ने यूएन में भारत को घेरने के लिए फिलीस्तीन की तस्वीर को कश्मीर का बता डाला था। भारत ने जब तस्वीर की सच्चाई सामने रखी तो दुनियाभर में पाकिस्तान का मजाक बना। अब पाकिस्तान ने फिर वैसी ही गलती दोहराई है और इस बार तो अपने आतंक को ही भारत का बताकर उसके स्टैंप भी छपवा दिए।
कश्मीर के एक संगठन ने यूएन सेक्रटरी जनरल को पत्र लिखकर ऐसे ही एक स्टैंप की सच्चाई बताई है। इस स्टैंप में पाकिस्तान समर्थित आतंक के पीड़ित भारतीय लोग हैं। यूएन में शिकायत करने वाले संगठन ने लिखा कि यह भारत को विश्व स्तर पर बदनाम करने का प्रयास है। संगठन ने लिखा कि आप पर ना सिर्फ हमारा अस्तित्व बचाने और पाकिस्तान समर्थित आतंक के प्रभाव को रोकने की भी जिम्मदारी है। साथ ही पाकिस्तान को निर्देशित करें कि वह इन शरारतपूर्ण स्टैंपों को वापस ले।'
पाक मीडिया में खलबली मची
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि इन स्टैंपों को छपवाने का सुझाव किसका था। इस प्रस्ताव को पहले सूचना मंत्रालय, फिर विदेश मंत्रालय और पीएम कार्यालय तक की मंजूरी दी गई थी। गौरतलब है कि बीते हफ्ते विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा यूएन के मंच से पाकिस्तान को निशाना बनाए जाने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। सुषमा की यूएनजीए सेशन से पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी से मीटिंग प्रस्तावित थी, मगर सुषमा ने इन स्टैंप को और बीएसएस जवान से पाकिस्तानी सेना की बदसलूकी जैसे मामलों का हवाला देकर मिलने से इनकार कर दिया था।