एशिया

China अपने निवेश के दम पर नेपाल पर नियंत्रण कर रहा, रिपोर्ट में दावा- KP Sharma Oli को दी गई रिश्वत

Highlights ग्लोबल वॉच एनालिसिस की एक रिपोर्ट का दावा है कि नेपाल के पीएम केपी शर्मा (KP Sharma Oli) ओली की संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार पीएम ओली का स्विट्जरलैंड (Switzerland) के जेनेवा स्थित मिराबॉड बैंक में अकाउंट है।

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चीन ने नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली को अपने नियंत्रण में किया।

काठमांडू। चीन (China) पर लगातार ये आरोप लगते रहे है कि वह कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों में निवेश कर उनकी नीतियों को प्रभावित करता है। इसके ताजा उदाहरण श्रीलंका (Sri Lanka) और मलेशिया (Malaysia) हैं, जहां पर निवेश के बहाने चीन ने उन्हें कई देशों के खिलाफ भड़काने का काम किया है। अब नेपाल में इस तरह का नजारा देखने को मिल रहा है। ग्लोबल वॉच एनालिसिस की रिपोर्ट का दावा है कि नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) भी चीन की इस चालबाजी का शिकार हैं।

रिपोर्ट में ओली पर चीन से रिश्वत लेने के भी आरोप लगा है। आरोप लगाया गया है कि ओली की संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ है। इस पैसे उन्होंने दूसरे देशों में काफी प्रॉपर्टीज खरीद रखीं हैं, जिसके बदले में उन्होंने चीन के बिजनेस प्लान को नेपाल में लागू कराया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार पीएम ओली का स्विट्जरलैंड के जेनेवा स्थित मिराबॉड बैंक में अकाउंट है। इस अकाउंट में 5.5 मिलियन डॉलर(करीब 41.34 करोड़ रु.)जमा हैं। उन्होंने यह रकम शेयर्स के तौर पर इन्वेस्ट की हुई है। इससे ओली और पत्नी राधिका शाक्य को सालाना करीब 1.87 करोड़ रु.का मुनाफा मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार नेपाल ही नहीं चीन दुनिया के कई गरीब मुल्कों भ्रष्ट नेताओं से सांठगांठ कर उन्हें खरीद रहा है। चीन इन नेताओं के जरिए पहले चीनी कंपनियों को इन देशों में एंट्री दिलाता है। इसके बाद उसके अंदरूली मामलों में भी दखल देता है। देश आर्थिक नीतियों को भी अपने फायदे के अनुसार लागू करवाता है।

ओली पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप!

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ओली ने साल 2015-16 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान कंबोडिया के टेलीकॉम्युनिकेशन सेक्टर में निवेश किया था। इस कार्य में उनकी मदद उस समय नेपाल में चीन के राजदूत रहे वी चुन्टई ने की। इसमें कंबोडिया के प्रधानमंत्री हूं सेन ने भी मदद की थी। इसके आलावा ओली पर दूसरे कार्यकाल के दौरान भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। नियमों को ताक पर रख उन्होंने दिसंबर 2018 में डिजिटल एक्शन रूम बनाने का करार चीनी टेलिकॉम कंपनी हुवावे को दिया।

मई 2019 में नेपाल टेलिकम्युनिकेशन ने हांगकांग की एक चीनी कंपनी के साथ रेडियो एक्सेस नेटवर्क तैयार करने का करार किया। इसी साल चीन की कंपनी जेटीई के साथ कोर 4 जी नेटवर्क लगाने का भी सौदा तय हुआ था। यह दोनों प्रोजेक्ट 130 मिलियन यूरो (करीब 1106 करोड़ रुपए) से पूरे किए जाने थे। इस मामले में ठेके आवंटन पर सवाल उठाए गए थे। बीते माह ही नेपाल ने 621 करोड़ रुपए की लागत से कोरोना प्रोटेक्टिव गियर्स और टेस्टिंग उपकरण खरीदे थे। ये ज्यादातर खराब थे। इसके विरोध में राजधानी काठमांडू में प्रदर्शन भी हुआ।

Updated on:
13 Jul 2020 04:22 pm
Published on:
13 Jul 2020 04:04 pm
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